Last Updated Feb - 11 - 2026, 06:19 PM | Source : Fela News
लखनऊ हाईकोर्ट ने कारोबारी निकांत जैन के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का मामला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथमदृष्टया अपराध साबित
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कारोबारी निकांत जैन को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उपलब्ध तथ्यों और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर प्रथमदृष्टया कोई अपराध नहीं बनता। इस फैसले के बाद न केवल जैन को कानूनी राहत मिली है, बल्कि इससे जुड़े प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
यह मामला ‘इन्वेस्ट यूपी' के तहत सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की मंजूरी से जुड़ा था। आरोप था कि निकांत जैन ने एक उद्यमी से परियोजना की स्वीकृति दिलाने के बदले 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। शिकायत कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई थी, जिसके आधार पर 20 मार्च 2025 को गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने जैन को गिरफ्तार किया और जांच की जिम्मेदारी विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को सौंप दी गई।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव सिंह की सिंगल बेंच में हुई। अदालत ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट और 17 मई 2025 को जारी तलबी आदेश को भी निरस्त कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने किसी लोकसेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की थी। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी प्रथमदृष्टया अपराध सिद्ध नहीं होता।
निकांत जैन की ओर से दलील दी गई कि आरोप अस्पष्ट, अनुमान आधारित और साक्ष्यविहीन हैं। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान कथित एक करोड़ रुपये की कोई बरामदगी नहीं हुई और न ही घटनास्थल का विधिवत नक्शा-नजरी तैयार किया गया। वकीलों ने यह भी कहा कि मामला कारोबारी प्रतिद्वंद्विता और प्रशासनिक भ्रम का परिणाम हो सकता है।
इस फैसले का असर प्रशासनिक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। निकांत जैन को मुख्य आरोपी बनाते हुए 'इन्वेस्ट यूपी' के तत्कालीन सीईओ और आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था। नियुक्ति विभाग ने उन्हें चार्जशीट जारी कर स्पष्टीकरण भी मांगा था। अब जब मुख्य आरोपी के खिलाफ मामला ही रद्द हो गया है, तो अभिषेक प्रकाश की स्थिति भी मजबूत होती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लिए जाने की भी चर्चा है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी जल्द बहाली हो सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा।
हाईकोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामलों में केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य भी जरूरी हैं। न्यायालय ने अपने फैसले में जांच प्रक्रिया की कमियों की ओर भी संकेत किया है, जो भविष्य में ऐसी विवेचनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
इस मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता, निवेश माहौल और कानूनी प्रक्रिया - तीनों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगे शासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।