Last Updated Dec - 08 - 2025, 02:55 PM | Source : Fela News
शिप्रा शर्मा के कलश लेकर किए गए अनोखे गृहप्रवेश ने वैदिक शादी को खास बनाया, रस्म ने पवित्रता और शुभ शुरुआत का संदेश दिया।
शादी तो हो गई थी, पर इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा शर्मा की वैदिक शादी और उसके बाद का गृहप्रवेश किसी साधारण रस्म से कम नहीं था। बहुचर्चित इस विवाह में शिप्रा ने जिस तरीके से ससुराल में प्रवेश किया, वह देखकर लोग दांतों तले उँगलियाँ दबाने को मजबूर हो गए, सिर पर लोटा (कलश) रखकर। यह कदम सिर्फ एक रस्म नहीं, प्रतीक था, पवित्रता, सौभाग्य और सांस्कृतिक श्रद्धा का।
5 दिसंबर 2025 को जयपुर के ताज आमेर होटल में आयोजित इस वैदिक विवाह में 100 से ज़्यादा पंडितों ने शाही अंदाज़ में मंत्रोच्चार कर दूल्हा-दुल्हन को सात फेरे दिलाए। समारोह इतना बड़ा और भव्य था कि पूरा होटल मानो एक मिनी-वृंदावन बन गया हो।
लेकिन शादी की शान-शौकत से बढ़कर, शिप्रा का गृहप्रवेश उस रस्म के कारण चर्चा में आ गया, जहां वह सिर पर कलश लेकर ससुराल पहुँची। कलश को हिंदू परंपरा में शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस रस्म का मतलब था कि नई दुल्हन अपने साथ घर में शुभ ऊर्जा, खुशहाली और सकारात्मक परिवर्तन लेकर आ रही है।
कुछ लोग इसे सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक रस्म कह रहे हैं,वहीं कईयों के लिए यह संकेत है उस बदलती भारतीय शादी-संस्कृति का, जिसमें युवाओं की धार्मिक और पारिवारिक पहचानों को आधुनिकता के साथ जोड़ा जा रहा है।
शादी हो, फंक्शन हो, संगीत-भजन हो, पर वो पल सबसे खास बना जब कलश सिर पर लिए शिप्रा शर्मा ने ससुराल में कदम रखा। माना जा रहा है कि इस रस्म से सिर्फ शुभ शुरुआत ही नहीं,एक नए जीवन की उम्मीद और सकारात्मक सोच भी जुड़ी है।