Last Updated May - 22 - 2026, 01:52 PM | Source : Fela News
आईपैक मामले में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट आज ED की याचिका पर सुनवाई करेगा. इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.
आईपैक मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार 22 मई 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें ममता बनर्जी, तत्कालीन डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है.
ED का आरोप है कि जनवरी 2026 में कोलकाता स्थित आईपैक (Indian Political Action Committee) दफ्तर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकानों पर चल रही छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच में दखल दिया था. यह रेड कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी.
ED ने लगाए गंभीर आरोप
एजेंसी का दावा है कि तलाशी अभियान के दौरान ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ आईपैक दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पहुंच गई थीं. ED के मुताबिक, जांच अधिकारियों को रोकने और दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे कार्रवाई प्रभावित हुई.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच करेगी. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा जांच में कथित हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है.
बेंच ने कहा था,
“यह सिर्फ राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.”
ममता बनर्जी ने आरोपों से किया इनकार
ममता बनर्जी ने अपने जवाबी हलफनामे में ED के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी मौजूदगी केवल पार्टी से जुड़े गोपनीय और संवेदनशील राजनीतिक डेटा को सुरक्षित रखने के लिए थी.
ममता का दावा है कि उन्हें जानकारी मिली थी कि तलाशी के दौरान 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी रणनीतिक जानकारी और डेटा की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि ED अधिकारियों की अनुमति के बाद कुछ दस्तावेज और डिवाइस वापस लिए गए और उसके बाद तलाशी सामान्य तरीके से जारी रही.
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
इस मामले की सुनवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी पर हमलावर है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है. अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हुई है.
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