Last Updated May - 02 - 2026, 02:19 PM | Source : Fela News
अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED का शिकंजा कस गया है. 70 करोड़ के घोस्ट अकाउंट नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जबकि रूपाली चाकणकर के रिश्तेदारों को नोटिस भेजे गए हैं.
कथित स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय ने जांच तेज कर दी है. 70 करोड़ रुपये के संदिग्ध घोस्ट अकाउंट नेटवर्क के खुलासे के बाद NCP नेता रूपाली चाकणकर के परिवार तक जांच की आंच पहुंच गई है. ED ने उनकी बहन प्रतिभा चाकणकर और भतीजे तन्मय को पूछताछ के लिए तलब किया है.
रूपाली चाकणकर के रिश्तेदारों को ED का नोटिस
अधिकारियों के मुताबिक, समता नागरी सहकारी पतसंस्था में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन वाले कई बैंक खातों की जांच की जा रही है. इनमें कुछ खातों में 1.20 करोड़ से लेकर 2.40 करोड़ रुपये तक का ट्रांजेक्शन मिला है. सूत्रों का दावा है कि इन खातों का लिंक सीधे अशोक खरात से जुड़ता है.
प्रतिभा चाकणकर ने इन खातों को फर्जी बताते हुए कहा है कि उनकी जानकारी के बिना जाली हस्ताक्षर से खाते खोले गए. अब ED उनके बयान के जरिए सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेगी.
70 करोड़ के घोस्ट अकाउंट नेटवर्क का खुलासा
ED जांच में सामने आया है कि 2022 से 2024 के बीच 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध लेनदेन हुआ. एजेंसी का आरोप है कि अशोक खरात ने धार्मिक गतिविधियों के नाम पर अनुयायियों से आधार-पैन जैसे KYC दस्तावेज जुटाए और उन्हीं के जरिए बेनामी व घोस्ट अकाउंट खुलवाए.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 134 से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट्स में खरात को नॉमिनी दिखाया गया और कई जगह उसका ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल हुआ. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था.
फर्जी खातों से करोड़ों का खेल कैसे चला?
जांच एजेंसी का मानना है कि इन खातों का इस्तेमाल पैसे को कई लेयर में घुमाने के लिए किया गया, ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके. करीब 100 संदिग्ध खातों में से 40 को स्पेशल अकाउंट की तरह चलाया गया, जिन्हें कोड नंबर देकर FD जैसी व्यवस्था बनाई गई.
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इन खातों में 35.53 करोड़ रुपये जमा हुए और 35.21 करोड़ रुपये निकाले गए. यानी पैसा लगातार घुमाकर सफेद करने का बड़ा खेल चल रहा था.
बैंक अधिकारियों और सहयोगियों पर भी शिकंजा
ED ने समता नागरी सहकारी पतसंस्था के निदेशक संदीप कोयते को भी पूछताछ के लिए बुलाया है. एजेंसी यह जानना चाहती है कि एक ही मोबाइल नंबर और नॉमिनी वाले इतने खातों पर बैंक सिस्टम ने अलर्ट क्यों नहीं दिया.
वहीं, अशोक खरात के करीबी सहयोगी अरविंद बावके ने स्वीकार किया है कि उसने खरात के कहने पर कई बार इन फर्जी खातों में नकदी जमा कराई थी. इससे जांच एजेंसी को मजबूत सुराग मिले हैं.
अहिल्यानगर से नासिक तक फैला नेटवर्क
मामला अब सिर्फ एक पतसंस्था तक सीमित नहीं रहा. ED ने नासिक की एक दूसरी सहकारी संस्था में भी 34 संदिग्ध घोस्ट अकाउंट्स की पहचान की है, जिनका कनेक्शन अशोक खरात से बताया जा रहा है. आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आने की संभावना है.
अब कौन-कौन फंसेगा?
ED की जांच जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि अशोक खरात का यह मामला सिर्फ धार्मिक चोले में छिपे आर्थिक साम्राज्य का नहीं, बल्कि करोड़ों की संगठित मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा खुलासा बनता जा रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगला नंबर किसका होगा.
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