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Eid ul fitr 2026: केरल-तमिलनाडु में आज क्यों मनाई जा रही ईद? देशभर में कल का इंतजार

Eid ul fitr 2026: केरल-तमिलनाडु में आज क्यों मनाई जा रही ईद? देशभर में कल का इंतजार

Last Updated Mar - 20 - 2026, 01:06 PM | Source : Fela News

Eid 2026: ईद रमजान के रोजों के पूरा होने पर मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। देशभर में ईद कल मनाई जाएगी, लेकिन केरल और तमिलनाडु में आज ही त्योहार मनाया जा रहा है। इसके पीछे चांद दिखने का अंतर मुख्य वजह है।
केरल-तमिलनाडु में आज क्यों मनाई जा रही ईद?
केरल-तमिलनाडु में आज क्यों मनाई जा रही ईद?

Eid ul fitr 2026 In india:ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जिसे ईद या मीठी ईद भी कहा जाता है। यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है। इस त्योहार का संबंध नए चांद, यानी शव्वाल महीने की शुरुआत से होता है। जैसे ही शव्वाल का चांद दिखाई देता है, ईद का त्योहार मनाया जाता है। ‘ईद’ का अर्थ खुशी और ‘फितर’ का मतलब रोजा खोलना होता है। इस दिन लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें रोजे रखने की ताकत दी।

इस साल भारत में ईद 21 मार्च को मनाई जाएगी, क्योंकि 19 मार्च को देश के ज्यादातर हिस्सों में शव्वाल का चांद नहीं दिखा। वहीं सऊदी अरब और कई खाड़ी देशों में चांद दिखाई देने के बाद 20 मार्च को ईद मनाई जा रही है। आमतौर पर भारत में सऊदी अरब के एक दिन बाद ईद मनाने की परंपरा रही है।

हालांकि, केरल और तमिलनाडु में इस बार स्थिति अलग है। यहां 19 मार्च को ही शव्वाल का चांद दिखाई देने की पुष्टि हुई, जिसके बाद इन राज्यों में 20 मार्च को ईद मनाई जा रही है। केरल के परप्पनंगडी के चेट्टीप्पाडी इलाके में चांद देखे जाने की जानकारी स्थानीय मौलवियों ने दी। इसी आधार पर इन राज्यों में खाड़ी देशों के साथ ही ईद का त्योहार मनाया जा रहा है।

ईद-उल-फितर के इतिहास की बात करें तो इस त्योहार की शुरुआत 624 ईस्वी में मानी जाती है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में इस पर्व की शुरुआत की थी। यह वह समय था जब मुसलमानों ने पहली बार रमजान के रोजे पूरे किए थे।

कहा जाता है कि जब पैगंबर मुहम्मद मदीना पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लोग दो खास दिनों पर जश्न मनाते हैं। इसके बाद उन्होंने बताया कि मुसलमानों के लिए दो प्रमुख त्योहार होंगे—ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा।

कुल मिलाकर, ईद-उल-फितर खुशियों, भाईचारे और कृतज्ञता का प्रतीक है। चांद दिखने के आधार पर अलग-अलग जगहों पर इसकी तारीख में फर्क हो सकता है, लेकिन इसका महत्व और उत्साह हर जगह एक जैसा रहता है।

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