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मुस्लिम वोटों में सेंध, महिला भरोसा टूटा... बंगाल में ममता कैसे हारी?

मुस्लिम वोटों में सेंध, महिला भरोसा टूटा... बंगाल में ममता कैसे हारी?

Last Updated May - 04 - 2026, 03:10 PM | Source : Fela News

West Bengal Assembly Election Results 2026:पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ममता बनर्जी का अभेद्य किला ढहा दिया. मुस्लिम, महिला और ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगाकर बीजेपी ने ऐसा चुनावी खेल पलटा कि TMC की सत्ता बह गई.
बंगाल में ममता कैसे हारी?
बंगाल में ममता कैसे हारी?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का किला दरकता दिख रहा है और भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है. सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा देने वाली ममता को जनता ने इस बार झटका दे दिया?

15 साल की सत्ता पर भारी पड़ा एंटी-इनकंबेंसी

2011 में लेफ्ट को हटाकर सत्ता में आई ममता बनर्जी ने बदलाव का वादा किया था, लेकिन 15 साल बाद वही सरकार जनता के गुस्से का निशाना बन गई. बेरोजगारी, उद्योगों का पलायन, सिंडिकेट राज, राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने लोगों के भीतर नाराजगी भर दी. बीजेपी ने इसी असंतोष को ‘परिवर्तन’ के नारे में बदल दिया.

भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था बना सबसे बड़ा हथियार

शिक्षक भर्ती घोटाला, आरजी कर रेप केस, कटमनी के आरोप, परिवारवाद और विपक्ष पर दबाव—इन सबने TMC की छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. बीजेपी लगातार यह संदेश देने में सफल रही कि बंगाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और अब सत्ता बदलना जरूरी है.

मुस्लिम वोट बैंक में पहली बार बड़ी सेंध

अब तक ममता बनर्जी का सबसे मजबूत सहारा मुस्लिम वोट माना जाता था, लेकिन इस बार मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे इलाकों में वोटों का बंटवारा साफ दिखा. इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला. मुस्लिम वोट का एक हिस्सा TMC से दूरी बनाता दिखा, जिसने मुकाबले का गणित बदल दिया.

SC-ST, मतुआ और चाय बागान वोटर BJP के साथ

उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती इलाकों में बीजेपी ने बेहद मजबूत संगठन खड़ा किया. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, मतुआ समुदाय और चाय बागान मजदूरों का झुकाव कमल की ओर गया. यही वर्ग पहले TMC के खिलाफ निर्णायक मूड में नजर आया.

महिला वोट भी ममता के हाथ से फिसला

लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के बावजूद महिला मतदाता इस बार पूरी तरह TMC के साथ नहीं दिखीं. बीजेपी ने महिलाओं को आर्थिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और सुरक्षा का बड़ा वादा किया. ग्रामीण महिलाओं और पहली बार वोट करने वाली युवतियों में इसका असर दिखा.

केंद्रीय बल और सख्त चुनावी निगरानी का असर

इस चुनाव में भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए. चुनाव आयोग ने बूथ मैनेजमेंट से लेकर मतदाता सूची तक सख्ती दिखाई. विपक्ष का आरोप रहा कि पहले TMC के प्रभाव वाले क्षेत्रों में खुलकर वोट नहीं पड़ पाता था, लेकिन इस बार मतदाताओं ने निर्भय होकर मतदान किया.

बंगाल में पहली बार कमल की बड़ी दस्तक

कभी एक विधायक से शुरुआत करने वाली बीजेपी अब बंगाल में सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है. साफ है कि यह जीत सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के 15 साल पुराने राजनीतिक मॉडल पर जनता के अविश्वास की कहानी है. बंगाल ने इस बार सच में ‘परिवर्तन’ चुन लिया.

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