Last Updated Feb - 16 - 2026, 06:16 PM | Source : Fela News
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। SIR प्रक्रिया में लापरवाही और शक्तियों के दुरुपयोग के आरोपों के बाद यह फै
पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जहां चुनाव आयोग ने ड्यूटी में गंभीर लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप में सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विशेष सारांश पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद की गई है।
चुनाव आयोग का यह कदम साफ संकेत देता है कि चुनावी कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव को आधिकारिक पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह सख्त फैसला लिया। आयोग का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में विभिन्न जिलों के असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (AERO) शामिल हैं, जो मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उससे जुड़े प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार थे। इनमें मुर्शीदाबाद, दक्षिण 24 परगना, पश्चिम मेदिनीपुर और जलपाईगुड़ी जैसे जिलों में तैनात अधिकारी शामिल हैं।
चुनाव आयोग को मिली शिकायतों और प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया और कुछ मामलों में नियमों की अनदेखी की गई।
चुनाव आयोग ने अपने निर्देश में यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच जल्द से जल्द पूरी की जाए और इसकी प्रगति की जानकारी आयोग को नियमित रूप से दी जाए। आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का जवाबदेह होना बेहद जरूरी है।
यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग का यह कदम भविष्य के चुनावों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि चुनाव से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सर्वोपरि है। यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, ताकि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी और सावधानी से करें।
फिलहाल, राज्य प्रशासन ने चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और आगे की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना चुनावी प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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