Last Updated May - 19 - 2026, 02:53 PM | Source : Fela News
PM Narendra Modi Norway Visit: नॉर्वे दौरे में PM मोदी के सवाल न लेने पर विवाद बढ़ गया. विदेशी पत्रकार के बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
PM Narendra Modi Norway Visit: नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रेस मीट के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया. पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त बयान तो दिया, लेकिन मीडिया के सवाल नहीं लिए. इसके बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने प्रेस स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठाए, जिससे माहौल गरमा गया.
पत्रकार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी कार्यक्रम खत्म होने के बाद मंच से जाते दिखाई दिए. वीडियो में सवाल पूछा गया कि “दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं लिया गया?” पत्रकार ने भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग का जिक्र करते हुए कहा कि सवाल पूछना मीडिया का अधिकार है.
इसके बाद विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में वही पत्रकार फिर मौजूद रहीं. उन्होंने भारत में मानवाधिकार, प्रेस की स्वतंत्रता और प्रधानमंत्री के मीडिया से दूरी को लेकर तीखे सवाल दागे. इस पर विदेश मंत्रालय के पश्चिमी मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने बेहद सख्त अंदाज में जवाब दिया.
सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी सभ्यता है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा जरूर है, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने महिलाओं को 1947 में ही वोट देने का अधिकार दे दिया था, जबकि कई विकसित देशों में यह अधिकार दशकों बाद मिला.
जब पत्रकार बार-बार बीच में टोकने लगीं तो सिबी जॉर्ज ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “कृपया बीच में मत टोकिए, आपने सवाल पूछा है तो जवाब भी सुनिए.” उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी को अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत है तो भारत में अदालत जाने का पूरा अधिकार है.
विदेश मंत्रालय ने भारत की मीडिया व्यवस्था का भी बचाव किया. सिबी जॉर्ज ने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही सैकड़ों न्यूज चैनल हैं और भारत की मीडिया दुनिया के सबसे बड़े मीडिया नेटवर्क्स में से एक है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी लोग एनजीओ की रिपोर्ट पढ़कर भारत को गलत तरीके से पेश करते हैं.
पूरा विवाद अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वहीं पत्रकार हेले लिंग ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ अपने पेशे के तहत सवाल पूछे थे और वह किसी सरकार की एजेंट नहीं हैं.
यह भी पढ़े