Last Updated Jan - 10 - 2026, 12:04 PM | Source : Fela News
AAP ने पंजाब पुलिस की फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आतिशी ने 'गुरु' शब्द नहीं बोला। पार्टी ने BJP-कांग्रेस से माफी की मांग की
पंजाब और दिल्ली की राजनीति में चल रहे 'गुरु' शब्द विवाद को लेकर अब नया मोड़ आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दावा किया है कि पंजाब पुलिस की फॉरेंसिक जांच में यह साफ हो गया है कि दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने अपने कथित बयान में 'गुरु' शब्द का इस्तेमाल किया ही नहीं था । AAP का आरोप है कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने के लिए एक फर्जी वीडियो बनाया और प्रसारित किया गया।
AAP नेताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि दोनों दलों ने जानबूझकर सिख गुरुओं के नाम को राजनीति में घसीटा और सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। AAP ने इसे न सिर्फ गलत बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
पार्टी के अनुसार, पंजाब पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने वायरल वीडियो की तकनीकी जांच की, जिसमें ऑडियो-वीडियो एडिटिंग और छेड़छाड़ के संकेत मिले। रिपोर्ट में कहा गया कि वीडियो में जिस शब्द को लेकर विवाद खड़ा किया गया, वह मूल बयान का हिस्सा नहीं था। AAP का दावा है कि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया।
इस खुलासे के बाद AAP ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने दोनों दलों से सिख समाज और पूरे देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। AAP नेताओं ने यह भी कहा कि फर्जी वीडियो साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
AAP ने इस मामले में शीर्ष नेतृत्व को भी घेरा। पार्टी का कहना है कि नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को सिख समाज से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उनकी पार्टियों से जुड़े नेताओं ने इस विवाद को बढ़ावा दिया।
वहीं, विपक्षी दलों ने AAP के दावों को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका कहना है कि सिर्फ एक रिपोर्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब पंजाब और दिल्ली की राजनीति पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रही है। फिलहाल, फॉरेंसिक रिपोर्ट के दावे ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है और अब सबकी नजरें आगे होने वाली कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई पर टिकी हैं।