Last Updated Apr - 08 - 2026, 03:09 PM | Source : Fela News
UP News: गोरखपुर में AI फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम का कमाल, पंप फेल होने की घटनाएं 60% तक घटीं, अब ऑटोमैटिक ऑपरेशन और समय पर मेंटेनेंस से बाढ़ से निपटना हुआ आसान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के टेक्नोलॉजी आधारित विजन का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), IoT, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्विन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर गोरखपुर नगर निगम ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जिसने मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को 65 प्रतिशत तक कम कर दिया है।
देश का पहला AI आधारित फ्लड मैनेजमेंट सेल
गोरखपुर में देश का पहला AI-आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (UFMC) स्थापित किया गया है, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग ने भी की है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, यह सिस्टम 24 घंटे पहले ही बारिश और जलभराव का 80 प्रतिशत तक सटीक पूर्वानुमान दे रहा है। ट्रायल के दौरान 250 से ज्यादा शिकायतों में से 70 प्रतिशत का समाधान कुछ ही घंटों में कर दिया गया।
कैसे काम करता है यह हाईटेक सिस्टम?
इस स्मार्ट सिस्टम में AI आधारित वर्षा पूर्वानुमान, सेंसर के जरिए पानी के स्तर की निगरानी और स्टॉर्म वाटर मॉडलिंग को जोड़ा गया है। जैसे ही जलस्तर बढ़ता है, सेंसर अलर्ट भेजते हैं और ऑटोमैटिक पंपिंग सिस्टम तुरंत चालू हो जाता है। इससे जलभराव वाले इलाकों में तुरंत राहत मिलती है और नुकसान कम होता है।
हर 15 मिनट में बारिश का अपडेट, रियल टाइम निगरानी
शहर में लगाए गए ऑटोमैटिक रेन गेज हर 15 मिनट में बारिश की जानकारी देते हैं। वहीं 110 से ज्यादा वाटर लेवल सेंसर हर 2 से 15 मिनट में डेटा भेजते हैं। जैसे ही नालों में पानी 80 प्रतिशत तक भरता है, अधिकारियों को अलर्ट मिल जाता है। पंपिंग स्टेशनों पर जलस्तर 60 प्रतिशत होते ही पंप अपने आप चालू हो जाते हैं।
पूरी तरह ऑटोमेटेड पंपिंग सिस्टम, 24x7 कंट्रोल रूम
शहर के सभी पंपिंग स्टेशनों को पूरी तरह ऑटोमेटेड कर दिया गया है। 24 घंटे काम करने वाला इमरजेंसी कंट्रोल रूम हर स्थिति पर नजर रखता है। 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 संवेदनशील पॉइंट्स की पहचान कर पहले से तैयारी की जाती है, जिससे जोखिम कम होता है।
3 स्टेप में बाढ़ पर काबू—पूर्वानुमान, तैयारी और कार्रवाई
UFMC की रणनीति तीन चरणों पर आधारित है—पहले से अनुमान लगाना, समय रहते तैयारी करना और फिर तुरंत कार्रवाई करना। बारिश से पहले ही टीमों को अलर्ट भेज दिया जाता है, मशीनें तैयार रखी जाती हैं और नालों की सफाई सुनिश्चित की जाती है।
शिकायतों का समाधान अब घंटों में, पहले लगते थे 12 घंटे
इस सिस्टम के लागू होने के बाद जलभराव की शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय काफी घट गया है। जहां पहले 10-12 घंटे लगते थे, अब 1-2 घंटे में समस्या का समाधान हो रहा है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिली है।
पंप फेल होने की घटनाएं 60% तक घटीं
AI सिस्टम की वजह से पंप अपने आप चालू हो जाते हैं और समय पर उनका मेंटेनेंस भी हो जाता है। इससे पंप बंद होने की घटनाएं 60 प्रतिशत तक कम हो गई हैं। रियल टाइम अलर्ट और बेहतर समन्वय के चलते कई इलाकों में इस बार बाढ़ की स्थिति ही नहीं बनी।
देश के लिए बना गोरखपुर मॉडल
गोरखपुर का यह मॉडल अब देश के दूसरे शहरों के लिए भी उदाहरण बनता जा रहा है। यह सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव सिस्टम है, जो आपदा आने से पहले ही उससे निपटने की तैयारी कर लेता है।
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