Last Updated May - 01 - 2026, 12:14 PM | Source : Fela news
Gurugram Rape Survivor: इंसाफ न मिलने से नाराज रेप पीड़िता पेट्रोल लेकर गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंच गई. कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए उसने आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने बचा लिया.
हरियाणा के गुरुग्राम से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां न्याय की आस में भटक रही एक रेप पीड़िता ने पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर आत्मदाह का प्रयास कर दिया. पीड़िता पेट्रोल की बोतल और माचिस लेकर दफ्तर के गेट तक पहुंच गई और खुद पर पेट्रोल डाल लिया. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत हरकत में आते हुए उसे आग लगाने से रोक लिया, लेकिन इस घटना ने पुलिस कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
चार महीने से आरोपी फरार, पीड़िता का फूटा गुस्सा
पीड़िता का आरोप है कि पानीपत के रहने वाले एक व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार किया था. इस मामले को लेकर उसने शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई. लगातार थानों और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद जब उसे कहीं से राहत नहीं मिली तो उसने यह खौफनाक कदम उठाने की कोशिश की. पीड़िता का कहना है कि वह हर बार सिर्फ आश्वासन सुनती रही, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ. इसी नाराजगी और हताशा में वह सीधे पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंच गई.
सोशल मीडिया पर पहले ही दे दी थी चेतावनी
बताया जा रहा है कि आत्मदाह की कोशिश से पहले पीड़िता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी डाला था. इतना ही नहीं, उसने ईमेल के जरिए पुलिस अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी थी कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह खुद को आग लगा लेगी. इसके बावजूद समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं. वीडियो में पीड़िता की चीख और बेबसी साफ महसूस की जा सकती है, जिसने इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है.
मौके पर पुलिस ने बचाई जान
जैसे ही पीड़िता ने खुद पर पेट्रोल डालना शुरू किया, वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसके हाथ से माचिस और पेट्रोल की बोतल छीन ली. काफी देर तक उसे शांत कराने की कोशिश की गई. इस दौरान पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
पुलिस ने क्या कहा?
गुरुग्राम पुलिस की ओर से फिलहाल इतना ही कहा गया है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कार्रवाई समय पर होती, तो क्या पीड़िता को अपनी जान देने की कोशिश तक पहुंचना पड़ता? यह घटना सिर्फ एक महिला की बेबसी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर उठता बेहद गंभीर सवाल है.
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