Last Updated Jan - 12 - 2026, 03:00 PM | Source : Fela News
हर बूथ तक पहुंचने की रणनीति, घर-घर संपर्क और 90 दिन का मिशन, नितिन नबीन ने साफ कर दिया चुनाव से पहले का रोडमैप।
तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी ने 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारी को औपचारिक रूप से तेज कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दिया है कि अब राजनीति मंचों और नारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर बूथ और हर घर तक पहुंचेगी। इसी सोच के तहत उन्होंने 90 दिन के डोर-टू-डोर और बूथ लेवल कैंपेन का असाइनमेंट दिया है।
नितिन नबीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्य में चुनाव जीतने के लिए जमीनी पकड़ सबसे जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि हर बूथ को मजबूत करना ही पार्टी की प्राथमिकता होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय मुद्दों, लोगों की समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं को सीधे सुनें और संगठन तक पहुंचाएं। यह अभियान सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि भरोसा बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि तमिलनाडु में पार्टी को लेकर जो धारणा बनी हुई है, उसे बदलने के लिए निरंतर संपर्क जरूरी है। नितिन नबीन ने कहा कि कार्यकर्ता सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि नियमित रूप से जनता के बीच मौजूद रहें। घर-घर जाकर सरकार की योजनाओं, केंद्र की नीतियों और पार्टी की सोच को सरल भाषा में समझाने पर खास जोर दिया गया है।
इस रणनीति के तहत बूथ स्तर पर डेटा जुटाने, नए मतदाताओं से जुड़ने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हर कार्यकर्ता को तय किया गया है कि वह कितने परिवारों से संपर्क करेगा और किन मुद्दों पर फीडबैक देगा। यह पूरी प्रक्रिया रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग के जरिए ऊपर तक पहुंचेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी अब तमिलनाडु में लंबी लड़ाई की तैयारी कर रही है। यहां परंपरागत रूप से द्रविड़ पार्टियों का दबदबा रहा है, लेकिन बीजेपी अब सीधे जनता से जुड़कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में है। 90 दिन का यह अभियान उसी दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
नितिन नबीन का यह संदेश साफ है कि 2026 का चुनाव सिर्फ भाषणों से नहीं जीता जाएगा। हर बूथ, हर गली और हर घर तक पहुंचना ही जीत की असली चाबी है। अब देखना यह होगा कि यह रणनीति जमीन पर कितना असर दिखाती है और क्या बीजेपी तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर पाती है।