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क्या कांग्रेस ने साफ कर दिया असली जिम्मेदार कौन

क्या कांग्रेस ने साफ कर दिया असली जिम्मेदार कौन

Last Updated Nov - 14 - 2025, 04:36 PM | Source : Fela News

कांग्रेस और आरजेडी के बीच जिम्मेदारी विवाद ने महागठबंधन में तनाव और टूट की आशंका बढ़ाई।
क्या कांग्रेस ने साफ कर दिया असली जिम्मेदार कौन
क्या कांग्रेस ने साफ कर दिया असली जिम्मेदार कौन

बिहार चुनाव 2025 के परिणामों के बाद महागठबंधन के भीतर गरम माहौल बन गया है। हार की जिम्मेदारी किसकी है, इस सवाल ने विपक्षी खेमे में नई खींचतान शुरू कर दी है। इसी बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर का बयान माहौल और तेज कर गया। उनके संदेश ने संकेत साफ दिए कि कांग्रेस इस हार की जिम्मेदारी खुद पर नहीं ले रही, गलतियों का बोझ आरजेडी पर ही डाला जा रहा है।

शशि थरूर ने परिणामों के बाद अपने बयान में कहा कि जनता ने इस चुनाव में बहुत स्पष्ट निर्णय दिया है और विपक्ष को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। लेकिन उनके शब्दों से यह भी झलकता रहा कि कांग्रेस खुद को इस पराजय का मुख्य कारण नहीं मानती। थरूर ने यह रवैया ऐसे समय में दिखाया है जब महागठबंधन के भीतर पहले से ही मतभेद और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है।

कांग्रेस का प्रदर्शन इस बार बेहद कमजोर रहा, लेकिन पार्टी का कहना है कि उपलब्ध सीटों, स्थानीय समीकरणों और संसाधनों के हिसाब से उन्होंने अपनी भूमिका निभाई। पार्टी के भीतर यह तर्क दिया जा रहा है कि आरजेडी पर मुख्य जिम्मेदारी इसलिए है क्योंकि गठबंधन का चेहरा वही था और चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा भी उसी के इर्द-गिर्द तय हुआ था। कई कांग्रेस नेताओं ने यह भी इशारा किया कि सीट बंटवारे से लेकर अभियान के नेतृत्व तक, हर मोर्चे पर आरजेडी ने अपनी तरह से फैसले लिए और इसका असर पूरे गठबंधन पर पड़ा।

दूसरी तरफ आरजेडी खेमे में यह बयान काफी नाराज़गी पैदा कर रहा है। पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि कांग्रेस न तो जमीन पर सक्रिय रही, न अभियान में आक्रामक दिखी, और अब हार का दोष दूसरों पर डालकर खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। यह मतभेद आने वाले दिनों में महागठबंधन की एकता पर बड़ा असर डाल सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक हार नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन के भीतर वास्तविक मनोदशा को उजागर करता है, जहां भरोसे से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप हावी हैं। कांग्रेस और आरजेडी के बीच यह तनाव अगर बढ़ा, तो भविष्य में किसी भी रणनीतिक साझेदारी पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

बिहार के इस चुनाव ने साफ कर दिया है कि महागठबंधन सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि समझ और सामंजस्य का खेल भी है। और यह सामंजस्य टूटता नजर आ रहा है, खासकर तब जब दोनों प्रमुख दल अपने-अपने तरीके से नतीजों की व्याख्या कर रहे हैं और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में पीछे नहीं हट रहे।

 

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