Last Updated Jan - 12 - 2026, 03:18 PM | Source : Fela News
प्रयागराज के माघ मेले में एक अनोखा बाबा लोगों की जिज्ञासा का कारण बन गया है, जिनके कैंप से निकलते ही भक्तों की पहचान बदल जाती है।
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में इस बार एक अलग ही बाबा चर्चा का विषय बने हुए हैं। न कोई भव्य मंच, न बड़े-बड़े प्रवचन, फिर भी उनके कैंप पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। वजह है इनका अनोखा नाम और उससे जुड़ी परंपरा। इस बाबा को लोग ‘फटीचर बाबा’ के नाम से जानते हैं और कहा जा रहा है कि जो भी भक्त इनके कैंप में आता है, उसका नाम भी ‘फटीचर’ हो जाता है।
फटीचर बाबा का कैंप मेले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले भक्तों को न तो कोई चमत्कार दिखाया जाता है और न ही बड़े वादे किए जाते हैं। बाबा का संदेश बेहद सादा है। उनका कहना है कि इंसान जब खुद को फकीर मान लेता है, तभी अहंकार खत्म होता है। इसी सोच के तहत जो भी उनके कैंप में प्रवेश करता है, वह खुद को ‘फटीचर’ कहने लगता है, यानी ऐसा इंसान जो दिखावे और घमंड से दूर हो।
बाबा का रहन-सहन भी उनके विचारों की तरह ही सरल है। फटे-पुराने कपड़े, साधारण भोजन और जमीन पर बैठकर बातचीत, यही उनकी पहचान है। भक्तों का कहना है कि बाबा के पास बैठते ही एक अलग तरह की शांति महसूस होती है। न कोई डर, न कोई लालच, बस जीवन को हल्के तरीके से देखने की सीख।
सोशल मीडिया पर फटीचर बाबा के कैंप के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग हैरान हैं कि आज के दौर में, जहां बाबा ब्रांड बनते जा रहे हैं, वहां एक ऐसा साधु भी है जो खुद को और अपने अनुयायियों को ‘फटीचर’ कहकर बुलाता है। कई लोग इसे सच्चे वैराग्य की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ इसे माघ मेले की सबसे अनोखी परंपरा कह रहे हैं।
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि वे सिर्फ जिज्ञासा में बाबा के पास पहुंचे थे, लेकिन उनकी बातों ने सोचने पर मजबूर कर दिया। बाबा किसी धर्म या पंथ की सीमाओं में बंधे नजर नहीं आते। उनका फोकस सिर्फ इंसान के भीतर की सादगी और संतोष पर है।
माघ मेले में जहां हर तरफ शोर, भक्ति और प्रदर्शन दिखाई देता है, वहीं फटीचर बाबा का कैंप बिना किसी प्रचार के अपनी पहचान बना रहा है। शायद यही वजह है कि लोग उन्हें देखने नहीं, बल्कि समझने आ रहे हैं। इस मेले में फटीचर बाबा यह याद दिलाते नजर आ रहे हैं कि असली आकर्षण दिखावे में नहीं, सादगी में छिपा होता है।