Last Updated May - 21 - 2025, 02:59 PM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून पर सुनवाई के दौरान, CJI गवई ने कहा कि अदालत तभी हस्तक्षेप करती है जब कोई स्पष्ट और गंभीर संवैधानिक समस्या हो।
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 20 मई 2025 को सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने स्पष्ट किया कि संसद द्वारा पारित कानूनों को संवैधानिक माना जाता है और जब तक कोई 'स्पष्ट और गंभीर' मामला प्रस्तुत नहीं किया जाता, अदालत हस्तक्षेप नहीं करती।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नया कानून वक्फ संपत्तियों को 'गैर-न्यायिक प्रक्रिया' के माध्यम से अधिग्रहित करने का प्रयास करता है, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन होता है।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि सुनवाई को तीन मुख्य मुद्दों तक सीमित रखा जाए, ताकि अंतरिम आदेश पारित किए जा सकें। हालांकि, सिब्बल और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस 'खंडित सुनवाई' के विरोध में तर्क दिया कि कानून की समग्र समीक्षा आवश्यक है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संशोधित कानून वक्फ की धार्मिक पहलुओं को नहीं छूता, बल्कि केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि अदालत केवल तभी हस्तक्षेप करेगी जब कोई 'स्पष्ट और गंभीर' मामला प्रस्तुत किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट अब इन दलीलों पर विचार कर रहा है और तय करेगा कि क्या वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 की वैधता पर पुनर्विचार आवश्यक है।