Last Updated Nov - 19 - 2025, 06:18 PM | Source : Fela News
सरकार ने पुराने वाहनों की फिटनेस टेस्ट फीस 10 गुना बढ़ाई, वाहन मालिकों में चिंता बढ़ी।
पुराने वाहनों की फिटनेस टेस्ट फीस में जबरदस्त उछाल , सरकार की नई पॉलिसी में 10 गुना तक बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने हाल ही में पुराने वाहनों की फिटनेस टेस्ट फीस में भारी बढ़ोतरी की है, जिससे पुराने वाहन मालिकों की जेब पर बड़ा असर दिखने लगा है। मोटर वाहन नियमों (Central Motor Vehicles Rules) में संशोधन के बाद, फिटनेस फीस अब वाहन की उम्र और प्रकार के अनुसार तीन अलग-स्लैब में बंटी है, 10-15 साल, 15-20 साल, और 20 साल से अधिक।
सबसे ज्यादा असर 20 साल से अधिक उम्र वाले भारी कमर्शियल वाहनों पर पड़ रहा है। पहले जहां उनकी फिटनेस टेस्ट फीस केवल ₹2,500 थी, अब वह बढ़कर ₹25,000 हो गई है। मीडियम-कमर्शियल वाहनों का ये आंकड़ा ₹1,800 से बढ़कर ₹20,000 हुआ है, जबकि हल्के मोटर वाहनों (कार, जीप) के लिए 20 साल से ऊपर की उम्र में यह शुल्क ₹15,000 तय किया गया है।
दो-पहिया वाहनों पर भी काटा गया है बढ़ा हुआ टैग, 20 साल से ऊपर की मोटरसाइकिलों की फिटनेस टेस्ट फीस पहले ₹600 थी, जो अब ₹2,000 हो गई है।
सरकार का मकसद साफ है: पुराने, पुरानी तकनीक वाले और संभवतः अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे पथ से हटाना। नए स्लैब और फीस का उद्देश्य वाहन स्वामियों को यह संकेत देना है कि अब पुरानी गाड़ियाँ रखना महंगा पड़ने वाला है।
नए नियम तुरंत लागू हो गए हैं, इसलिए जितने वाहन 10 साल या उससे ज्यादा पुराने हैं, उन्हें अब नई बढ़ी हुई फीस देना होगी।
बस यही चिंता बाकी है, क्या यह कदम पुराने वाहनों के स्क्रैपिंग की दिशा में कदम है, या सिर्फ फिटनेस टेस्ट का एक नया महंगा अध्याय?
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