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ऊपर हाई वोल्टेज बिजली, फिर ट्रेन में जनरेटर क्यों? जानिए राज

ऊपर हाई वोल्टेज बिजली, फिर ट्रेन में जनरेटर क्यों? जानिए राज

Last Updated Jan - 09 - 2026, 01:43 PM | Source : Fela News

इलेक्ट्रिक ट्रेनें तारों से चलती हैं, फिर भी जनरेटर क्यों जरूरी है? जानिए पेंटोग्राफ से लेकर कोच तक बिजली पहुंचने का पूरा सिस्टम।
ऊपर हाई वोल्टेज बिजली
ऊपर हाई वोल्टेज बिजली

पटरी के ऊपर दौड़ते मोटे तार, इंजन से जुड़ा पेंटोग्राफ और तेज रफ्तार से भागती ट्रेन - यह नजारा देखकर आमतौर पर यही लगता है कि इलेक्ट्रिक ट्रेन पूरी तरह ऊपर से मिलने वाली बिजली पर चलती है। लेकिन जब आप किसी ट्रेन के पीछे लगे जनरेटर यान या कोच के नीचे घूमते उपकरण देखते हैं, तो सवाल उठता है कि आखिर जनरेटर की जरूरत क्यों पड़ती है ? क्या ऊपर से मिलने वाली बिजली काफी नहीं होती?

दरअसल, इलेक्ट्रिक ट्रेन को जो बिजली मिलती है, वह सीधे Indian Railways के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) से आती है। पेंटोग्राफ के जरिए ट्रेन को 25,000 वोल्ट (25kV) की हाई वोल्टेज बिजली मिलती है। यह बिजली मुख्य रूप से इंजन को चलाने के लिए होती है, यानी ट्रेन की रफ्तार और मूवमेंट इसी पर निर्भर करती है।

लेकिन ट्रेन सिर्फ इंजन से नहीं चलती, बल्कि उसमें लगे कोच भी बिजली पर निर्भर होते हैं। एसी, पंखे, लाइट्स, चार्जिंग पॉइंट, पैंट्री कार के उपकरण और सिग्नलिंग सिस्टम-इन सबको लगातार और स्थिर बिजली चाहिए। यही वह जगह है, जहां जनरेटर या पावर सप्लाई सिस्टम की अहम भूमिका सामने आती है।

असल में, ऊपर से आने वाली हाई वोल्टेज बिजली को सीधे कोचों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए उसे पहले ट्रांसफॉर्म करके कम वोल्टेज में बदला जाता है। इलेक्ट्रिक इंजनों में इसी काम के लिए सहायक सिस्टम लगे होते हैं, जो कोचों को जरूरी बिजली सप्लाई करते हैं। कई आधुनिक ट्रेनों में अलग से डीजल जनरेटर नहीं होता, बल्कि इंजन से जुड़ा "हेड-ऑन जनरेशन सिस्टम" (HOG) काम करता है।

फिर भी, कुछ परिस्थितियों में जनरेटर बेहद जरूरी हो जाता है। मान लीजिए ट्रेन किसी ऐसे सेक्शन में खड़ी है, जहां

ओवरहेड लाइन में फॉल्ट आ गया हो, या स्टेशन पर बिजली सप्लाई अस्थायी रूप से बंद हो जाए। ऐसे समय में जनरेटर यात्रियों को अंधेरे और असुविधा से बचाता है। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में यह बैकअप सिस्टम बहुत अहम होता है। इसके अलावा, कोच यार्ड में खड़े रहते समय भी ट्रेन को बिजली की जरूरत होती है। सफाई, मेंटेनेंस और प्री-कूलिंग जैसे कामों के लिए जनरेटर या बाहरी पावर सप्लाई का इस्तेमाल किया जाता है।

संक्षेप में कहें तो इलेक्ट्रिक ट्रेन की असली ताकत ऊपर से आने वाली हाई वोल्टेज बिजली है, लेकिन जनरेटर या सहायक पावर सिस्टम उसका सुरक्षा कवच है। यह सुनिश्चित करता है कि सफर के दौरान यात्रियों को किसी भी हाल में बिजली से जुड़ी परेशानी न हो। यही वजह है कि हाई वोल्टेज सिस्टम होने के बावजूद ट्रेन में जनरेटर की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।

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