Last Updated Nov - 15 - 2025, 12:14 PM | Source : Fela News
बिहार चुनाव नतीजों ने पूरे राज्य का राजनीतिक संतुलन बदल दिया है। NDA ने 200 से ज्यादा सीटें हासिल कर इतिहास जैसा प्रदर्शन किया, जबकि महागठबंधन केवल 35 सीटों पर
बिहार विधानसभा चुनाव का यह परिणाम चौंकाने वाला तो है, लेकिन इसके पीछे कई स्पष्ट संकेत भी छिपे हैं। NDA ने इस बार अत्यधिक संगठित और आक्रामक रणनीति अपनाई। बीजेपी और जेडीयू दोनों ने बूथ स्तर तक माइक्रो मैनेजमेंट किया, जिससे उनका वोट बैंक पहले से ज्यादा मजबूती के साथ एकजुट दिखा।
ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का असर खास तौर पर दिखाई दिया। सड़क, स्वास्थ्य, राशन और महिलाओं को दी गई सुविधाओं ने एक बड़ा वर्ग NDA के पक्ष में खड़ा कर दिया। इसी वजह से कई सीटों पर मुकाबला शुरू से ही एकतरफा होता गया।
उधर महागठबंधन की स्थिति लगातार कमजोर होती रही। RJD–Congress गठबंधन न तो मजबूत मुद्दे खड़ा कर पाया और न ही व्यापक जनसंदेश दे सका। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और “परिवर्तन” जैसे मुद्दे उन्होंने उठाए, लेकिन इनका जमीन पर असर वैसा नहीं हुआ जैसा विपक्ष को उम्मीद थी।
तेजस्वी यादव की रैलियों में भीड़ नजर आई, लेकिन वोटों में यह समर्थन उतना नहीं बदल सका। कांग्रेस कई सीटों पर बेहद कमजोर प्रदर्शन करती दिखी, और कई जगह वोट ट्रांसफर भी सफल नहीं हो सका। इसका सीधा लाभ NDA को मिला।
NDA की सफलता का एक कारण सामाजिक समीकरण का सटीक प्रबंधन भी रहा। बीजेपी और जेडीयू दोनों ने अपने कोर वोटरों के साथ-साथ नए वर्गों को जोड़ने की कोशिश की थी, और यह रणनीति निर्णायक साबित हुई।
इसके अलावा, पीएम मोदी की रैलियों और प्रचार अभियान ने चुनावी माहौल में भारी प्रभाव डाला। कई क्षेत्रों में मोदी फैक्टर ने आखिरी समय में NDA के पक्ष में वोटों का रुझान साफ कर दिया।
इस तरह, पूरा चुनाव एकतरफा होता गया और नतीजों ने महागठबंधन को झटका दे दिया। बिहार में NDA की इस भारी जीत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मजबूत संगठन, जमीन से जुड़ा काम और सही समय पर प्रभावी प्रचार, ये तीनों मिलकर किसी भी चुनाव को निर्णायक बना सकते हैं।
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