Header Image

बारिश का पूर्वानुमान कैसे लगाता मौसम विभाग समझिए पूरा सिस्टम

बारिश का पूर्वानुमान कैसे लगाता मौसम विभाग समझिए पूरा सिस्टम

Last Updated Feb - 10 - 2026, 03:11 PM | Source : Fela News

मौसम विभाग बारिश से पहले पूर्वानुमान के लिए सैटेलाइट, रडार और न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन मॉडल का उपयोग करता है, जिससे मौसम की सटीक जानकारी मिलती है।
बारिश का पूर्वानुमान कैसे लगाता मौसम विभाग समझिए पूरा सिस्टम
बारिश का पूर्वानुमान कैसे लगाता मौसम विभाग समझिए पूरा सिस्टम

बारिश आने से पहले मौसम विभाग को इसकी जानकारी कैसे मिलती है, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक मॉडलों की मदद से वर्षा का पूर्वानुमान जारी करता है, जिसमें कई स्तरों पर डेटा संग्रह और विश्लेषण शामिल होता है।

बताया जा रहा है कि मौसम पूर्वानुमान की प्रक्रिया सैटेलाइट निगरानी से शुरू होती है। अंतरिक्ष में मौजूद मौसम उपग्रह बादलों की गति, घनत्व, नमी और तापमान से जुड़ी जानकारी लगातार भेजते रहते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर यह आकलन किया जाता है कि किस क्षेत्र में वर्षा बनने की स्थिति विकसित हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, डॉप्लर वेदर रडार भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये रडार बादलों के भीतर होने वाली गतिविधियों, वर्षा की तीव्रता और तूफानी परिस्थितियों को मापते हैं। रडार से प्राप्त संकेतों के जरिए यह पता लगाया जाता है कि बादल किस दिशा में बढ़ रहे हैं और कितनी मात्रा में बारिश हो सकती है।

इस बीच न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन (NWP) मॉडल मौसम पूर्वानुमान की रीढ़ माने जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन मॉडलों में तापमान, हवा की गति, वायुदाब, आर्द्रता और समुद्री परिस्थितियों से जुड़े लाखों डेटा पॉइंट्स डाले जाते हैं। सुपरकंप्यूटर इन आंकड़ों का गणितीय विश्लेषण कर भविष्य के मौसम पैटर्न का अनुमान तैयार करते हैं।

प्रशासन का कहना है कि वैश्विक और क्षेत्रीय दोनों स्तरों के मॉडल एक साथ उपयोग किए जाते हैं ताकि पूर्वानुमान अधिक सटीक हो सके। अलग-अलग समय अंतराल, जैसे कुछ घंटों, एक दिन या कई दिनों पहले—के लिए अलग मॉडल रन किए जाते हैं।

वहीं दूसरी ओर जमीनी मौसम केंद्र भी लगातार तापमान, वर्षा, हवा और नमी का डेटा रिकॉर्ड करते हैं। इन आंकड़ों को सैटेलाइट और रडार डेटा के साथ मिलाकर अंतिम पूर्वानुमान जारी किया जाता है।

कुल मिलाकर सैटेलाइट, रडार, जमीनी अवलोकन और सुपरकंप्यूटर आधारित न्यूमेरिकल मॉडल के संयुक्त विश्लेषण से IMD बारिश का पूर्वानुमान जारी करता है, जिससे लोगों और प्रशासन को पहले से तैयारी का समय मिल पाता है।

यह भी पढ़े 

मथुरा में परिवार की दर्दनाक मौत, जांच में जुटी पुलिस

Share :

Trending this week

ट्विशा डेथ केस में बड़ा झटका

May - 28 - 2026

Twisha Sharma Case Bhopal:भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में मध्य... Read More

PM मोदी का सवाल सुन चौंके मंत्री

May - 28 - 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और फ्यूल संकट के बीच प्रधानमं... Read More

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

May - 27 - 2026

बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर स... Read More