Last Updated Feb - 28 - 2025, 11:36 AM | Source : Fela News
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने असम चुनाव की तैयारियों पर कांग्रेस नेताओं संग बैठक की। इसमें चुनावी रणनीति, अनुशासन और चुनौतियों
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी ने असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में आगामी चुनाव की रणनीति, पार्टी अनुशासन और नई चुनौतियों पर चर्चा की गई। राहुल गांधी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पार्टी में कोई भी नेता अनुशासन तोड़ेगा, तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
असम चुनाव की नई दिशा
असम में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के तहत होने जा रहे हैं। नए परिसीमन में मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या में कमी देखने को मिली है, जिसके चलते राजनीतिक समीकरण में भी बदलाव आए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी ने नेताओं से अधिक मेहनत करने और नए राजनीतिक परिदृश्य के अनुरूप रणनीति अपनाने के निर्देश दिए।
नए परिसीमन का असर: चुनावी समीकरण बदलने के साथ-साथ बूथ स्तर पर वोटर लिस्ट में हो रहे बदलाव पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से सबक लेते हुए यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या अनुशासनहीनता पर तुरंत कार्रवाई हो।
राजनीतिक एकजुटता: असम के नेताओं से आग्रह किया गया कि वे सामूहिक नेतृत्व में एकजुट होकर चुनाव लड़ें। इस एकजुटता से भाजपा के अत्याचार और गुंडागर्दी के खिलाफ मजबूत मोर्चा तैयार किया जा सकेगा।
राहुल गांधी के निर्देश और पार्टी अनुशासन
बैठक में राहुल गांधी ने यह भी बताया कि अगर कोई नेता पार्टी का अनुशासन तोड़ेगा, तो उसके खिलाफ बिना किसी विलंब के कार्रवाई की जाएगी। लोकसभा के नेताओं को स्पष्ट निर्देश देते हुए उन्होंने प्रभारी जितेंद्र सिंह से कहा कि अनुशासनहीनता की किसी भी घटना को गंभीरता से लिया जाएगा।
सख्त कदम: “कोई भी अनुशासन तोड़े तो तुरंत करें कार्रवाई” – यह संदेश राहुल गांधी के बयान में साफ दिखाई देता है, जिससे पार्टी के अंदर अनुशासन और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जा रही है।
विचार-विमर्श: बैठक में कुछ नेताओं ने शिकायत भी की कि कांग्रेस नेता सीएम हिमंत के संपर्क में रहते हैं। इस मुद्दे पर भी नेताओं को एकजुट होकर काम करने और पार्टी के हित में निर्णय लेने की सलाह दी गई।
असम में कांग्रेस की चुनौतियाँ और आगामी रणनीति
असम में पिछली बार कांग्रेस ने एआईयूडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता प्राप्त नहीं कर सकी थी। भाजपा ने 2016 में असम में सरकार बनाने में अपनी सफलता हासिल की थी। अब कांग्रेस छोटे दलों के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, हालांकि सीट बंटवारे की तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
चुनौतीपूर्ण मुद्दे: सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि असम में भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी के अत्याचार और गुंडागर्दी से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया गया है।
संगठन की मजबूती: बैठक के बाद प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि कांग्रेस का संगठन मजबूत है और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के साथ लोगों के मुद्दों को उठाया जाएगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि हर पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस का चेहरा होगा।
असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने संगठन और अनुशासन को मजबूत करने का जोरदार संदेश दिया है। राहुल गांधी के कड़े निर्देश, नए परिसीमन के राजनीतिक समीकरण और बूथ स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने की रणनीति से पार्टी ने चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। अब देखना यह है कि पार्टी की यह एकजुटता और सख्त अनुशासन असम की राजनीति में किस प्रकार अपनी छाप छोड़ता है।
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