Last Updated Jan - 31 - 2026, 12:25 PM | Source : Fela News
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर खुलकर बात करते हुए कहा कि भारत दोनों पक्षों का मित्र है और शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी इजरायल - फिलिस्तीन संघर्ष के बीच भारत की भूमिका को लेकर फिलिस्तीन की विदेश मंत्री Warsen Aghabekian Shahin ने बड़ा बयान दिया है। एबीपी न्यूज़ से एक सुपर एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति इस पूरे संघर्ष में बेहद खास है, क्योंकि भारत इजरायल और फिलिस्तीन दोनों का मित्र रहा है।
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष अब केवल जमीन या सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की राजनीति, सुरक्षा ढांचे और वैश्विक कूटनीति को गहराई से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन में जारी अस्थिरता का असर पड़ोसी देशों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक गठबंधनों पर साफ दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi को लेकर बात करते हुए विदेश मंत्री शाहिन ने कहा कि भारत लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे मूल्यों में विश्वास करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इन मूल्यों के आधार पर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। मंत्री शाहिन के अनुसार, भारत एक सेतु की तरह काम कर सकता है, जो दोनों पक्षों के बीच संवाद को बढ़ावा दे ।
शांति प्रक्रिया की शुरुआत को लेकर फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा कि इसके लिए इजरायल की ओर से ईमानदार मंशा दिखाना जरूरी है। उनके अनुसार इजरायल को यह समझना होगा कि अपने पड़ोसियों की सुरक्षा के बिना उसकी खुद की सुरक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शांति की एक कीमत होती है और उस कीमत को चुकाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाना अनिवार्य है।
इजरायल की मौजूदा नेतन्याहू सरकार पर सवाल उठाते हुए मंत्री शाहिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू लगातार फिलिस्तीनी राज्य के खिलाफ बयान देते रहे हैं। ऐसे में उनसे बिना किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के शांति पहल की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं लगता। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
मंत्री शाहिन ने यह भी कहा कि अमेरिका, भारत और अन्य प्रभावशाली देशों को अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर इजरायल पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने जोर दिया कि स्थायी समाधान केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान से ही संभव है।
इस बयान के बाद यह साफ होता है कि फिलिस्तीन भारत को केवल एक मित्र राष्ट्र के रूप में नहीं, बल्कि संभावित शांति-साझेदार के रूप में भी देख रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन गई है।
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