Last Updated Mar - 20 - 2026, 03:55 PM | Source : Fela News
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में स्थायी शांति केवल स्वार्थ त्याग, एकता और अच्छे मूल्यों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि भारत की “सब एक हैं” की परंपरा विश्व को शांति और सौहार्द का रास्ता दिखा सकती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि दुनिया में स्थायी शांति तभी संभव है, जब लोग स्वार्थ छोड़कर एकता और अच्छे मूल्यों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों की असली वजह स्वार्थ और वर्चस्व की चाह है, जिसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में कही, जहां वे कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। भागवत ने कहा कि भारत के पास दुनिया को एकजुट करने की ताकत है और यही शक्ति वैश्विक संघर्षों को रोक सकती है।
भागवत के अनुसार, दुनिया पिछले करीब 2000 वर्षों से शांति के लिए अलग-अलग विचारों पर प्रयोग कर रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता की भावना आज भी कई देशों में मौजूद है, जो संघर्ष को बढ़ावा देती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही आ सकती है। उनके मुताबिक, भारत की ‘सब एक हैं’ की प्राचीन परंपरा दुनिया को सौहार्द और सहयोग का रास्ता दिखा सकती है।
भागवत ने कहा कि आज दुनिया विनाश की ओर बढ़ती नजर आ रही है, लेकिन ऐसे समय में यह विश्वास भी बढ़ रहा है कि भारत इन संघर्षों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष में कोई सार नहीं है, असली ताकत समन्वय और सहयोग में है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का दृष्टिकोण मानवता पर आधारित है, जबकि कई देश केवल शक्ति और वर्चस्व को महत्व देते हैं। भारत का संविधान और उसकी सांस्कृतिक विरासत इसी सोच को दर्शाती है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों के आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है, भले ही इसमें व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
कुल मिलाकर, भागवत ने दुनिया को संघर्ष से दूर रहकर एकता, सहयोग और मानवीय मूल्यों के रास्ते पर चलने की अपील की, ताकि स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
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