Last Updated Jul - 31 - 2025, 02:24 PM | Source : Fela News
हांगकांग में हो रही 'पिपरावा रत्नों' की नीलामी को भारत ने 'अनैतिक' बताते हुए रोकने की मांग की है। सरकार ने इसे बुद्ध के पवित्र अवशेष बताते हुए Sotheby’s को कानू
भारत सरकार ने हांगकांग में Sotheby’s द्वारा की जा रही पिपरावा रत्नों की नीलामी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संस्कृति मंत्रालय ने इस नीलामी को “भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों, साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक समझौतों का उल्लंघन” बताया है और इन पवित्र अवशेषों को भारत वापस लाने की मांग की है।
यह रत्न 1898 में ब्रिटिश ज़मींदार विलियम क्लॉक्सटन पेप्पे ने उत्तर भारत के पिपरावा स्थित अपने निजी भूखंड पर खुदाई के दौरान खोजे थे। अब उनके उत्तराधिकारी क्रिस पेप्पे और अन्य दो वारिस मिलकर इन रत्नों को नीलाम कर रहे हैं, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 100 मिलियन हांगकांग डॉलर (लगभग ₹100 करोड़) बताई जा रही है।
इन रत्नों में ऐमेथिस्ट, मूंगा, मोती, गोमेद, सीप, सोना और अन्य कीमती पत्थर शामिल हैं, जिन्हें पेंडेंट, मनके या सजावटी वस्तुओं के रूप में तैयार किया गया है। यह नीलामी 7 मई को निर्धारित है, लेकिन बुद्ध अनुयायियों, विद्वानों और बौद्ध संगठनों में इसे लेकर गहरी नाराज़गी है।
भारत सरकार का कहना है कि यह अवशेष केवल ऐतिहासिक नहीं बल्कि धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, और इन्हें भारत लाकर संरक्षित किया जाना चाहिए।
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