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डील फिर अटकी या दबाव की नई चाल

डील फिर अटकी या दबाव की नई चाल

Last Updated Jan - 13 - 2026, 03:47 PM | Source : Fela News

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। ट्रंप की नई टैरिफ धमकी के बीच सामने आए ताजा अपडेट ने साफ कर दिया है कि इस हफ्ते दोनों देशों के ब
डील फिर अटकी या दबाव की नई चाल
डील फिर अटकी या दबाव की नई चाल

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर उम्मीदें एक बार फिर झटका खाती नजर आ रही हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की औपचारिक ट्रेड बातचीत का कोई कार्यक्रम तय नहीं है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर माहौल गर्म कर दिया है।

दरअसल, ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सर्जियो गोर के बयान के बाद यह संकेत मिले कि अमेरिका की ओर से ट्रेड पॉलिसी को लेकर सख्त रुख अपनाया जा सकता है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत फिलहाल ठंडे बस्ते में जा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच संपर्क बना हुआ है, लेकिन इस हफ्ते किसी ठोस बैठक या वार्ता की योजना नहीं है।

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय से अटकी हुई है। कृषि उत्पादों पर टैरिफ, डिजिटल टैक्स, वीजा नियम और मार्केट एक्सेस जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद रहे हैं। हालांकि पहले संकेत मिले थे कि 2026 से पहले किसी समझौते की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उस उम्मीद को कमजोर कर दिया है।

ट्रंप की टैरिफ धमकी को कई विशेषज्ञ दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका अक्सर बातचीत से पहले सख्त बयान देकर सामने वाले देश पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाता है। भारत के मामले में भी यह तरीका पहले अपनाया जा चुका है। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि डील पूरी तरह रुक गई हो, लेकिन इसकी रफ्तार जरूर धीमी पड़ सकती है।

भारतीय व्यापार जगत इस स्थिति को सतर्क नजर से देख रहा है। अमेरिका भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और किसी भी तरह के अतिरिक्त टैरिफ का असर निर्यात, आईटी सेवाओं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। वहीं भारत भी साफ कर चुका है कि वह अपने घरेलू हितों से समझौता किए बिना ही किसी डील पर आगे बढ़ेगा।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि सही समय और अनुकूल माहौल का इंतजार किया जा रहा है। दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं और व्यापार के अलावा रक्षा व कूटनीतिक रिश्ते भी मजबूत हैं, इसलिए पूरी तरह टकराव की स्थिति बनने की संभावना कम मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील एक बार फिर अधर में लटकी दिख रही है। ट्रंप की टैरिफ धमकी और बातचीत टलने की खबर ने संकेत दे दिया है कि रास्ता आसान नहीं है। अब नजर इस पर होगी कि आने वाले हफ्तों में दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटते हैं या यह डील फिर लंबे इंतजार की कहानी बन जाती है।

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