Last Updated Dec - 19 - 2025, 04:46 PM | Source : Fela News
बीएमसी-पीएमसी चुनाव से पहले शरद- अजित पवार की नजदीकी बढ़ी, शिवसेना UBT अलर्ट, गठबंधन समीकरणों में हलचल तेज।
महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और पिंचप्री-चिंचवड़ महानगरपालिका (PMC) चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। खासतौर पर शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के बीच बेटी-चाचा की बढ़ती नज़दीकी ने उद्धव ठाकरे-नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को अलर्ट कर दिया है, और रिश्तों के बदलते संकेतों ने राजनीतिक खलबली मचा दी है।
पिछले कुछ समय में शरद पवार के सार्वजनिक कार्यक्रमों में अजित पवार के साथ बैठी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनसे यह संकेत मिला है कि लंबे समय से पार्टी विभाजन और मतभेदों के बाद पारिवारिक एकता की और कदम बढ़ता दिख रहा है। इसी बीच अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की सोशल मीडिया पोस्ट ने भी इस नए मेल-जोल को और चर्चा में ला दिया है।
इस बदलाव का सीधा असर राजनीति पर यह है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर NCP (SP) यानी शरद पवार-नेतृत्व वाला दल अजित पवार की NCP से हाथ मिलाता है, तो कोई आम गठबंधन नहीं होगा। शिवसेना (UBT) के नेता सचिन अहिर ने कहा है कि उन्होंने NCP (SP) को कहा है कि वे अगर अजित पवार के पक्ष में जाएंगे तो कोई गठबंधन नहीं किया जाएगा और ऐसे में शिवसेना (UBT) NCP के बजाय MNS के साथ भी जा सकती है।
बीएमसी तथा PMC चुनावों की रणनीति तय करने के दौरान यह मामला और अहम हो गया है क्योंकि महायुती (BJP-शिंदे सेना) और विपक्षी गुटों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। उदाहरण के लिये, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मिलकर संयुक्त रैलियाँ कर रहे हैं ताकि शहर में अपनी ताकत दिखा सकें। वहीं भाजपा-शिंदेसेना गठबंधन भी अपनी तैयारी में आगे है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पवार परिवार के भीतरी संबंधों में यह बदलाव मौजूदा चुनावी माहौल में गठबंधन-वाट बाँट की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। अगर शरद पवार और अजित पवार फिर से साथ दिखाई देते हैं तो यह महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ा संकेत होगा, लेकिन अगर दोनों अलग-अलग राह चुनते हैं तो गठबंदन की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
इस सबके बीच उद्धव ठाकरे-नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि NCP (SP) अपनी चुनावी रणनीति में अजित पवार की NCP से दूरी बनाए रखे, ताकि उनका गठबंधन मजबूत रहे। भाजपा और उसके साथी शिंदेसेना भी अपनी सीट-वाट बाँट और प्रत्याशी चयन को लेकर रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिससे BMC-PMC चुनावों में हर गठबंधन की चाल और मायने बदलेंगे।
अब सबकी निगाह है कि पवार-पवार का यह नज़दीकी खेल चुनावी समीकरण को कैसे प्रभावित करेगा और यह किस गठबंधन को सबसे बड़ा फायदा देगी।
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