Last Updated Dec - 08 - 2025, 04:35 PM | Source : Fela News
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर संसद में तीखी बहस, मोदी ने इसे प्रेरणा बताया तो विपक्ष ने विविधता और स्वीकार्यता सवाल उठाए।
देश की संसद में 8 दिसंबर 2025 को, 150 साल पूरे हुए वंदे मातरम् के, और नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक मौके पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह गीत कभी अंग्रेजों को करारा जवाब था और आज भी युवा-पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आज की इस खास चर्चा में लोकसभा में 10 घंटे का समय तय था, जिसमें प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ को आजाद भारत की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि 150 साल पहले जो जयघोष हिंदी-हिंदुस्तानी की पहचान बनकर उठा था, उसी ने स्वतंत्रता आंदोलन में जनमानस को जोश और संकल्प के साथ जोड़ने का काम किया।
लेकिन जैसे हर प्रतीक के साथ होता है, विवाद भी जुड़ा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ गीत नहीं, बल्कि भावनाओं और धर्म-संस्कृति से जुड़ा बयान हो जाता है। कुछ समुदायों ने ‘मातरम्’ शब्द को लेकर ऐतिहासिक आपत्ति जताई है, जिसके कारण यह गीत सार्वभौमिक स्वीकार्यता प्राप्त नहीं कर पाया।
आज की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण बनी क्योंकि इसे सिर्फ एक गीत की याद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान, एकता और सांस्कृतिक विरासत के सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है। जो लोग इसे इतिहास के गौरव स्वरूप देखते हैं, वो इसे नारे और प्रतीक की तरह देखते हैं; वहीं अन्य लोग इसे आधुनिक भारत की विविधता और संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं।
संसद में यह बहस इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल अतीत की याद नहीं, भविष्य की दिशा तय कर सकती है कि हम अपने इतिहास, पहचान और संस्कृति को किस नजरिए से देखें।