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हिडमा का अंत कैसे हुआ सब साफ नहीं…

हिडमा का अंत कैसे हुआ सब साफ नहीं…

Last Updated Nov - 18 - 2025, 03:38 PM | Source : Fela News

सुकमा के घने जंगलों में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए टॉप नक्सली कमांडर मदवि हिडमा और उसकी पत्नी को ढेर कर दिया। 50 लाख इनामी हिडमा कई हमलों का मास्टरमा
हिडमा का अंत कैसे हुआ सब साफ नहीं…
हिडमा का अंत कैसे हुआ सब साफ नहीं…

छत्तीसगढ़ के सुकमा जंगलों में हुए बड़े एनकाउंटर ने नक्सल मोर्चे की तस्वीर बदल दी है। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई में टॉप नक्सली कमांडर मदवि हिडमा और उसकी पत्नी के मारे जाने की खबर ने पूरे इलाके में हलचल बढ़ा दी है। हिडमा पर 50 लाख का इनाम था और वह कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।

सुकमा के घने इलाकों में यह मुठभेड़ घंटों चली, जिसमें कमांडो यूनिट्स ने बड़ी सफलता हासिल की। शुरुआती पुष्टि के अनुसार सुरक्षाबलों ने कुल छह नक्सलियों को ढेर किया, जिनमें हिडमा और उसकी पत्नी भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अधिकारी अभी अंतिम पहचान प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन घटनास्थल से बरामद हथियार और जानकारी इस ओर संकेत दे रहे हैं कि ऑपरेशन में बड़ा लक्ष्य साधा गया है।

हिडमा बस्तर ज़ोन का बेहद खतरनाक और रणनीतिक दिमाग वाला नेता माना जाता था। कई सालों से वह सुरक्षा बलों के लिए सबसे मुश्किल चुनौती बना हुआ था। उसकी पकड़ जंगलों पर मजबूत थी और वह बारूदी सुरंगों तथा घात लगाकर हमले करने की रणनीति का माहिर था। कई बड़े हमलों में उसका सीधा रोल माना जाता रहा, यही कारण था कि उस पर भारी इनाम रखा गया था।

इस एनकाउंटर के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही हैं। माना जा रहा है कि इससे नक्सलियों के टॉप लीडरशिप स्ट्रक्चर को जबरदस्त झटका लगेगा। हिडमा की पत्नी भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती थी, इसलिए उसका समाप्त होना भी नक्सली नेटवर्क के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

इलाके में लगातार अभियान चल रहे थे और सुराग मिल रहे थे कि हिडमा अपनी टीम के साथ मूव कर रहा है। सुरक्षाबलों ने घेराबंदी करके उसे दबोचा और मुठभेड़ शुरू हो गई। अब सुरक्षा एजेंसियाँ इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी तरह का नक्सली पलटवार न हो।

इस घटना ने बस्तर के हालात में एक नई शुरुआत का संकेत दिया है। हिडमा लंबे समय से नक्सल हिंसा का चेहरा बना हुआ था। उसका खात्मा, अगर आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाता है, तो यह इस पूरे आंदोलन के लिए सबसे बड़ा झटका होगा और इलाके में शांति बहाल करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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