Last Updated Jul - 01 - 2025, 01:19 PM | Source : Fela News
सिर्फ 90 दिनों में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' जनआंदोलन में बदला। खंडवा जिले ने जल संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर मध्य प्रदेश में नई मिसाल पेश की।
मध्य प्रदेश में 30 मार्च 2025 को शुरू हुआ ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सशक्त जनआंदोलन बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे सांस्कृतिक गौरव और जनसहभागिता से प्रेरित एक परिवर्तनकारी अभियान बताया है।
सिर्फ 90 दिनों में इस अभियान ने राज्यभर में जल संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए। खंडवा जिले ने इस मुहिम में सबसे बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए 1.29 लाख से अधिक जल संरचनाएं बनाईं, जिससे भूजल पुनर्भरण में यह जिला देश में अग्रणी बन गया। पूरे राज्य में 83,000 से ज्यादा फार्म पोंड्स बनाए गए, जिनकी योजना SIPRI जैसे AI आधारित टूल्स के जरिए बनाई गई। इससे किसानों की फसल पैदावार बढ़ी और पानी पर निर्भरता कम हुई।
अभियान के तहत नर्मदा, क्षिप्रा और ताप्ती जैसी प्रमुख नदियों सहित कुल 145 नदी स्रोतों के पुनर्जीवन का कार्य शुरू किया गया। साथ ही, प्रदेश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी संरक्षित किया गया। 2,000 से अधिक ऐतिहासिक बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया गया, जिनमें अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित बावड़ी भी शामिल है। इसके जरिए ‘बावड़ी उत्सव’ के रूप में सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया गया।
प्रधानमंत्री के ‘जल सैनिक’ अभियान के आह्वान पर राज्यभर में 2.3 लाख युवाओं को 'जलदूत' और 'अमृत मित्र' के रूप में तैयार किया गया। ये युवा जल संरक्षण के स्थानीय दूत बनकर काम करेंगे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रामचरितमानस और वैदिक साहित्य का हवाला देते हुए कहा कि जल भारतीय सभ्यता की आत्मा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता और शासन के सहयोग से कोई भी मिशन आंदोलन का रूप ले सकता है।