Last Updated Nov - 19 - 2025, 12:56 PM | Source : Fela News
वनशक्ति केस में CJI गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन ने 2:1 बहुमत से फैसला दिया। लेकिन तीसरे जज, जस्टिस उज्जल भुइयां, बहुमत से सहमत नहीं हुए और अपने अलग फैसले में कड़
सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2025 को बड़ा फैसला सुनाते हुए वनशक्ति मामले में 16 मई का पुराना आदेश वापस ले लिया। इस पुराने आदेश में कहा गया था कि जिन निर्माणों को पर्यावरण मंजूरी काम पूरा होने के बाद मिली है, उन्हें गिरा दिया जाए।
तीन जजों की बेंच—CJI बी.आर. गवई, जस्टिस विनोद के. चंद्रन और जस्टिस उज्जल भुइयां—ने यह फैसला (2:1) बहुमत से दिया।
लेकिन जस्टिस भुइयां इस फैसले से बेहद नाराज थे और उन्होंने 97 पेज में अपनी असहमति दर्ज की। CJI गवई का फैसला 84 पेज का था।
इस फैसले के वापस होने से ओडिशा के एम्स समेत देशभर की कई बड़ी सार्वजनिक परियोजनाओं को बचा लिया गया। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि अगर पुराना आदेश लागू रहा, तो लगभग 20,000 करोड़ की परियोजनाओं को ध्वस्त करना पड़ेगा।
कौन-कौन सी परियोजनाएं खतरे में थीं?
– ओडिशा में 962 बेड वाला एम्स
– एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
– कई पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
जस्टिस भुइयां क्यों नाराज हुए?
उन्होंने कहा कि CJI का फैसला पर्यावरण कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
उनके अनुसार:
उन्होंने बहुमत के फैसले को “निर्दोष राय” बताया, जो पर्यावरण कानून के मूल सिद्धांतों को अनदेखा करता है।
जस्टिस विनोद चंद्रन क्या बोले?
उन्होंने अलग से अपना फैसला लिखते हुए कहा कि असहमति (dissent) लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन 16 मई का आदेश कई कानूनी प्रावधानों और पर्यावरण संरक्षण कानून की शक्तियों को नजरअंदाज करता था। इसलिए उसका वापस लिया जाना जरूरी था।