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कानपुर लैंबॉर्गिनी केसः 8.30 करोड़ की अंडरटेकिंग पर कार रिलीज

कानपुर लैंबॉर्गिनी केसः 8.30 करोड़ की अंडरटेकिंग पर कार रिलीज

Last Updated Feb - 28 - 2026, 01:01 PM | Source : Fela News

कानपुर में चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे के मामले में कोर्ट ने 20 दिन बाद कार को 8.30 करोड़ रुपये की अंडरटेकिंग पर रिलीज करने का आदेश दिया। वाहन ग्वालटोली थाने में खड़ी थी।
8.30 करोड़ की अंडरटेकिंग पर कार रिलीज
8.30 करोड़ की अंडरटेकिंग पर कार रिलीज

कानपुर के बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जब्त की गई लग्जरी कार को रिलीज करने का आदेश दे दिया है। करीब 20 दिनों से ग्वालटोली थाने में खड़ी इस महंगी कार को अब 8.30 करोड़ रुपये की जमानत और अंडरटेकिंग के बाद मालिक को सौंपा जाएगा। इस मामले ने शुरुआत से ही शहर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

जानकारी के मुताबिक, वाहन संख्या DL 11CN 4018 (लैंबॉर्गिनी) को पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 203 सहित अन्य प्रावधानों के तहत सीज किया था। अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में वाहन स्वामी की ओर से कार को सुपुर्दगी में देने की मांग की गई थी। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीजेएस सूरज मिश्रा की अदालत ने आवश्यक दस्तावेज और शर्तें पूरी करने के बाद कार रिलीज करने का आदेश जारी किया।

इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया भी काफी चर्चा में रही। बताया जाता है कि प्रारंभिक स्तर पर दो अदालों ने इस मामले को सुनने से इनकार कर दिया था। बाद में यह मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश पारित किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहन मालिक को 8.30 करोड़ रुपये की जमानत राशि और अंडरटेकिंग दाखिल करनी होगी, जिसके बाद ही वाहन की सुपुर्दगी दी जाएगी।

गौरतलब है कि सात फरवरी को कानपुर के भैरौघाट चौराहे के पास यह हादसा हुआ था। आरोप है कि बड़े तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ने तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से कई लोगों को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में छह लोग घायल हुए थे। घटना के बाद शिवम मिश्रा के मौके से भागने का वीडियो भी सामने आया था, जिसने मामले को हाई प्रोफाइल बना दिया।

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था। हालांकि, मामले में जमानती धाराएं होने के कारण शिवम मिश्रा को अदालत से पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसके बाद बचाव पक्ष की ओर से जब्त की गई कार को रिलीज करने के लिए आवेदन दाखिल किया गया था।

अदालत के आदेश के बाद अब वाहन मालिक को निर्धारित राशि की अंडरटेकिंग जमा करनी होगी। यह राशि वाहन के अनुमानित मूल्य के अनुरूप तय की गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अदालतें आमतौर पर वाहन के मूल्य के बराबर या उसके आसपास की जमानत राशि तय करती हैं, ताकि भविष्य में आवश्यक होने पर वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर हाई प्रोफाइल मामलों में कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक संतुलन पर चर्चा को जन्म दिया है। जहां एक ओर हादसे में घायल लोगों के लिए न्याय की मांग उठी, वहीं दूसरी ओर अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत वाहन रिलीज का निर्णय लिया।

फिलहाल, सभी की निगाहें आगे की कानूनी कार्रवाई और मामले की प्रगति पर टिकी हैं।

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