Last Updated Feb - 02 - 2026, 05:14 PM | Source : Fela News
तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री KCR से फोन टैपिंग केस में SIT ने आवास पर चार घंटे पूछताछ की, बाहर भारी संख्या में समर्थक जुटे रहे।
तेलंगाना की राजनीति में हलचल तब तेज हो गई जब फोन टैपिंग मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (BRS) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) से उनके नंदी नगर स्थित आवास पर लंबी पूछताछ की। यह पूछताछ करीब चार घंटे तक चली, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई को प्रदेश की हालिया राजनीतिक घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
रविवार दोपहर SIT की टीम सुरक्षा घेरा बनाते हुए बंजारा हिल्स स्थित KCR के आवास पर पहुंची। अधिकारियों ने तय प्रक्रिया के तहत पूर्व मुख्यमंत्री से सवाल-जवाब शुरू किए। पूछताछ का मुख्य फोकस कथित फोन टैपिंग ऑपरेशन, उसकी प्रशासनिक मंजूरी, और उस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बातचीत पर रहा। सूत्रों के अनुसार, SIT यह जानने की कोशिश कर रही है कि उस समय की सरकार के शीर्ष स्तर पर इस ऑपरेशन की कितनी जानकारी थी।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक विरोधियों, कुछ न्यायिक हस्तियों और यहां तक कि पार्टी के भीतर के लोगों की निगरानी के लिए अवैध तरीके से फोन टैपिंग कराई गई थी। इसी सिलसिले में पहले ही कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें पूर्व खुफिया विभाग से जुड़े अधिकारी भी शामिल बताए जाते हैं। जांच की कड़ियां अब राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचती दिख रही हैं।
पूछताछ के दौरान KCR के घर के बाहर का दृश्य भी कम महत्वपूर्ण नहीं था । जैसे ही खबर फैली कि SIT की टीम उनके घर पहुंची है, बड़ी संख्या में BRS कार्यकर्ता और समर्थक वहां जमा होने लगे। नंदी नगर की सड़कों पर समर्थकों का हुजूम दिखाई दिया। वे नारेबाजी करते हुए अपने नेता के समर्थन में खड़े रहे। सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस ने पूरे इलाके में कड़ा बंदोबस्त किया, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
करीब साढ़े पांच बजे जब SIT की टीम बाहर निकली, तब KCR भी अपने आवास से बाहर आए और समर्थकों का अभिवादन किया। उनका संयमित रवैया और समर्थकों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया। यह दृश्य साफ संकेत देता है कि मामला केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक असर भी व्यापक हो सकते हैं।
तेलंगाना के इतिहास में यह पहला अवसर है जब पूर्व मुख्यमंत्री से इस तरह के गंभीर आरोपों के सिलसिले में इतनी लंबी पूछताछ की गई है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं और हर स्तर पर तथ्यों की पुष्टि करना चाहती हैं।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि SIT की यह पूछताछ आगे किस दिशा में जाती है। क्या इससे नए खुलासे होंगे? क्या राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर और लोगों से पूछताछ होगी ? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि फोन टैपिंग मामला तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा मोड़ बनता दिख रहा है।
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