Last Updated Feb - 27 - 2026, 05:28 PM | Source : Fela News
दिल्ली शराब नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किया। फैसले के बाद दोनों नेता भावुक हो गए और समर्थकों ने राहत जताई।
दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को इस मामले में बरी कर दिया। लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले ने दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा। इसी के साथ आबकारी नीति मामले में आरोपी नंबर 18 के रूप में नामित अरविंद केजरीवाल को दोषमुक्त कर दिया गया। मनीष सिसोदिया को भी राहत मिली।
फैसले के बाद अदालत के परिसर का माहौल भावुक हो गया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दोनों स्पष्ट रूप से भावनाओं से भरे नजर आए। बताया जाता है कि आदेश सुनते ही दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। वे अपने वकील हरिहरन के भी गले लगे। यह दृश्य अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के लिए बेहद मार्मिक था ।
यह मामला दिल्ली सरकार की नई शराब नीति को लेकर उठे विवाद से जुड़ा था। आरोप लगाए गए थे कि नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में अनियमितताएं हुईं और कुछ निजी खिलाड़ियों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों ने इस संबंध में कई पूछताछ और गिरफ्तारियां भी की थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस को जन्म दिया था ।
केजरीवाल और सिसोदिया लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है। कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने इसे "सत्य की जीत" करार दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया और इसे न्यायपालिका पर भरोसे की मिसाल बताया।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बहस जारी रहेगी। यह स्पष्ट है कि इस फैसले का असर आने वाले समय में दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष पर होती है। यदि पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सकें, तो अदालत को आरोपी को बरी करना पड़ता है। इस मामले में भी अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।
फिलहाल, इस फैसले से केजरीवाल और सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से चल रही जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह निर्णय उनके राजनीतिक भविष्य के लिए भी अहम माना जा रहा है। अदालत का यह आदेश अब दिल्ली की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।
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