Last Updated Nov - 19 - 2025, 01:54 PM | Source : Fela News
केरल सरकार ने SIR प्रक्रिया रोकने की मांग की, चुनावों और प्रशासनिक बोझ में टकराव का आरोप लगाया।
केरल सरकार ने विशेष गहन पुनरावलोकन (SIR) की प्रक्रिया को राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों के खत्म होने तक स्थगित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उनका कहना है कि SIR और चुनाव साथ-साथ चलेंगे, तो प्रशासन पर बहुत बड़ा बोझ पड़ेगा।
सरकार की याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग का SIR कैलेंडर और स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं (LSGI) के चुनाव शेड्यूल में सीधा टकराव है। सरकार का तर्क है कि दोनों कामों के लिए एक ही स्टाफ और संसाधन उपयोग किए जा रहे हैं , BLOs, EROs, AEROs समेत कुल लगभग 25,668 अधिकारियों को SIR के लिए तैनात किया गया है, जबकि चुनाव में पहले से ही 1.76 लाख सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी और 68,000 सुरक्षा कर्मी लगेंगे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनावों को पूरा करने का संवैधानिक समय सीमा (21 दिसंबर 2025 तक) है, लेकिन SIR की समय-सीमा उसी बीच में घूमती है — जैसे कि नामों की एंट्री, ड्राफ्ट रोल प्रकाशित करना और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया।
केरल हाई कोर्ट में पहले ये याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे आगे नहीं बढ़ाया। हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही SIR से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, इसलिए यह बेहतर होगा कि राज्य भी वहीं चले। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि “न्यायिक अनुशासन” की वजह से हाई कोर्ट को इस मामले में दखल देने का सोचना नहीं चाहिए।
इस बीच एक गंभीर आरोप भी सामने आया है , SIR के काम के दबाव से एक BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) अनीश जॉर्ज ने कथित आत्महत्या की। परिवार और राजनीतिक दलों का कहना है कि लगातार घर-घर फॉर्म भरना, देर रात तक काम करना, और चुनावी ज़िम्मेदारियों का बोझ उनकी मानसिक सीमा पार कर गया था।
राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट से मांग कर रही है कि SIR को दिसंबर 21 तक रोका जाए , यानी जब तक स्थानीय निकाय चुनाव पूरी तरह हो जाएँ।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य की सत्ता SIR को “निष्पक्षता और लोकतांत्रिक सिद्धांत” के लिए खतरा मान रही है।
यह भी पढ़ें: तेजी से बढ़ता थायराइड कैंसर: क्या यह बीमारी लाइलाज है?
Jun - 12 - 2026
370 Rupees Biryani Controversy:गुरुग्राम के चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ वि... Read More