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कुणाल कामरा ने 'गद्दार' टिप्पणी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया

कुणाल कामरा ने 'गद्दार' टिप्पणी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया

Last Updated Apr - 09 - 2025, 01:36 PM | Source : Fela News

मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अपनी हालिया 'गद्दार' टिप्पणी को लेकर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए बॉम्बे ह
कुणाल कामरा ने 'गद्दार' टिप्पणी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया
कुणाल कामरा ने 'गद्दार' टिप्पणी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया

एफआईआर का पृष्ठभूमि: कुणाल कामरा पर आरोप है कि उन्होंने अपने स्टैंड-अप शो 'नया भारत' के दौरान एकनाथ शिंदे के खिलाफ 'गद्दार' शब्द का उपयोग किया, जिससे शिंदे समर्थकों में नाराजगी फैल गई। शिवसेना विधायक मुरजी पटेल की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने कामरा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353(1)(b), 353(2) (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान) और 356(2) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया है। 

हाई कोर्ट में याचिका: कामरा के वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज़ सीरवाई ने न्यायमूर्ति सरंग कोतवाल और एस.एम. मोडक की खंडपीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया, जिसमें एफआईआर की 'कानूनीता, शुद्धता और उपयुक्तता' को चुनौती दी गई है। अदालत ने मामले की तात्कालिकता को स्वीकार करते हुए मंगलवार को सुनवाई के लिए सहमति जताई है। 

कामरा का पक्ष: कुणाल कामरा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर उनके संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों, विशेषकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि इस एफआईआर का पंजीकरण राजनीतिक भाषणों पर 'ठंडा प्रभाव' डालता है। 

पुलिस समन और जवाब: मुंबई पुलिस ने कामरा को तीन बार समन भेजा, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराने की इच्छा जताई। कामरा वर्तमान में तमिलनाडु में निवास कर रहे हैं और वहां से सहयोग करने की पेशकश की है। 

यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक व्यंग्य की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है। बॉम्बे हाई कोर्ट में आगामी सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि न्यायपालिका इस मामले को कैसे देखती है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा में क्या निर्णय लेती है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की है। 
 

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