Last Updated Jan - 27 - 2026, 04:57 PM | Source : Fela News
भारत-EU शिखर सम्मेलन 2026 में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर की घोषणा की। EU नेतृत्व ने
भारत-EU शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा। उन्होंने इसे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए “विन-विन” करार दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने भी इस समझौते का स्वागत किया। EU प्रतिनिधियों का कहना था कि भारत और यूरोपीय संघ, दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और इस FTA के जरिए दोनों पक्ष वैश्विक सप्लाई चेन, निवेश और तकनीकी सहयोग को मजबूत करेंगे। बताया गया कि यह समझौता मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिर और भरोसेमंद व्यापारिक ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।
सूत्रों के अनुसार इस FTA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ कम करने, निवेश को बढ़ावा देने और बाजार तक पहुंच आसान बनाने पर सहमति बनी है। भारत को इससे टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स और आईटी सेवाओं के लिए यूरोपीय बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। वहीं EU को ऑटोमोबाइल, ग्रीन टेक्नोलॉजी और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारत में विस्तार का रास्ता मिलेगा।
इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत की आर्थिक सुधार प्रक्रिया और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती देगा। उनका कहना था कि FTA से रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं दूसरी ओर EU नेताओं ने भारत को तेजी से उभरती वैश्विक आर्थिक शक्ति बताते हुए भरोसा जताया कि यह साझेदारी आने वाले दशकों तक असर दिखाएगी।
बताया जा रहा है कि इस समझौते पर बातचीत पिछले कई वर्षों से चल रही थी और कई संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनने के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया। दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि आगे भी ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा किया जाएगा। शिखर सम्मेलन के इस फैसले को भारत-EU संबंधों में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है
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