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भारत और EU ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील फाइनल की 27 जनवरी 2026

भारत और EU ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील फाइनल की 27 जनवरी 2026

Last Updated Jan - 27 - 2026, 04:48 PM | Source : Fela News

भारत और यूरोपीय संघ ने लगभग दो दशक की बातचीत के बाद व्यापार समझौता फाइनल किया है. इस डील से दोनों के बीच वस्तु व सेवा व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।
भारत और EU ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील फाइनल की 27 जनवरी 2026
भारत और EU ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील फाइनल की 27 जनवरी 2026

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में लगभग 20 साल की लंबी बातचीत के बाद मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) फाइनल करने की घोषणा की है, जिसे दोनों पक्ष “मदर ऑफ ऑल डील्स” कह रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन समेत उच्चस्तरीय प्रतिनिधि हैदराबाद हाउस में मिले और यह समझौता घोषित किया गया. इस समझौते का उद्देश्य भारत और EU के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करना तथा निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना है।

सूत्रों के अनुसार यह फ्री ट्रेड डील वस्तुओं पर आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से कम करेगी और लगभग 90% वस्तुओं पर शुल्कों को समाप्त करने या कम स्तर पर लाने का प्रस्ताव रखती है. भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल, चमड़ा तथा फार्मा जैसे श्रम-गहन उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच चाहता है, जबकि EU कार, मशीनरी, रसायन और शराब जैसे उत्पादों के लिए भारतीय बाजार तक बेहतर पहुँच की मांग कर रहा है।

भारत औद्योगिककरण की रक्षा करते हुए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण देने की कोशिश कर रहा है, इसी वजह से कृषि तथा डेयरी जैसे क्षेत्रों को समझौते से फिलहाल बाहर रखा गया है. लेकिन कारों पर भारत द्वारा लगाए जाने वाले उच्च शुल्कों को लगभग 40% तक घटाने तथा बाद में 10% के करीब चरणबद्ध रूप से लाने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जिससे यूरोपीय कार निर्माताओं को भारत में अधिक सरल बाजार प्रवेश मिल सकेगा।

इसके अलावा सेवाओं के क्षेत्र में भी प्रावधान रखा गया है, जिसमें टेलीकॉम, प्रोफेशनल सेवाएं और तकनीकी विशेषज्ञों की आवाजाही को सुगम बनाने की दिशा में प्रावधान शामिल हैं, जिससे भारतीय पेशेवरों को यूरोपीय बाजारों तक पहुंच में मदद मिल सकती है. हालांकि डेटा सुरक्षा तथा पर्यावरण से जुड़े नियमों के मसलों पर अभी भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं और दोनों पक्ष आगे की कानूनी समीक्षा और अनुमोदन प्रक्रियाओं के बाद इसे औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित कर सकते हैं।

प्रशासन का कहना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को यूरोपीय बाजार में व्यापक स्तर पर पहुँचाने में मदद करेगा और दोनों तरफ के व्यापार सम्बन्धों को रणनीतिक रूप से मजबूत करेगा, खासकर जब वैश्विक व्यापार गतिशीलताओं में बदलाव देखे जा रहे हैं।

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