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चमत्कार जैसा 115 साल बाद लौट आया बिछड़ा रिश्ता…

चमत्कार जैसा 115 साल बाद लौट आया बिछड़ा रिश्ता…

Last Updated Dec - 09 - 2025, 04:26 PM | Source : Fela News

अयोध्या में मांगी मन्नत, 115 साल बाद फिजी के दंपति को मिला बिछड़ा परिवार
चमत्कार जैसा 115 साल बाद लौट आया बिछड़ा रिश्ता…चमत्कार जैसा 115 साल बाद लौट आया बिछड़ा रिश्ता…
चमत्कार जैसा 115 साल बाद लौट आया बिछड़ा रिश्ता…चमत्कार जैसा 115 साल बाद लौट आया बिछड़ा रिश्ता…

 

अयोध्या में की गई एक साधारण सी मन्नत ने फिजी के दंपति के लिए चमत्कार जैसा रूप ले लिया. यूपी के एक गांव में उन्हें अपना 115 साल पुराना बिछड़ा परिवार मिल गया।

फिजी में रहने वाले एक भारतीय मूल के दंपति लंबे समय से अपने पूर्वजों की तलाश में थे. पारिवारिक इतिहास बताता था कि उनके पुरखे लगभग 1900 के आसपास ब्रिटिश शासन के दौरान गिरमिटिया मजदूर के रूप में फिजी ले जाए गए थे. परिवार भारत से अलग हो गया और पीढ़ियों तक उनका कोई संपर्क नहीं रहा. जानकारी के अभाव में वे सिर्फ अंदाज और टूटे-फूटे किस्सों पर निर्भर थे।

कई सालों की खोज के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो दोनों अयोध्या पहुंचे. उन्होंने राम लला के दरबार में यही प्रार्थना की कि उन्हें अपने मूल और अपने परिवार का सटीक पता चल जाए. आश्चर्य की बात यह है कि कुछ ही समय बाद उन्हें एक सूचना मिली, उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक गांव में उनके पूर्वजों का 115 साल पुराना रिकॉर्ड और परिवार से जुड़ी जानकारी मौजूद है।

दंपति जब गांव पहुंचे, तो वहां के लोगों ने पुराने दस्तावेज़, जमीन से जुड़े कागज़ और परिवार के नामों का विवरण दिखाया. धीरे-धीरे दोनों पक्षों ने यह पुष्टि कर ली कि यह वही परिवार है जिससे उनके पुरखे फिजी ले जाए गए थे. भावुक मुलाकात के दौरान गांव वालों ने पारंपरिक ढंग से दंपति का स्वागत किया. वर्षों पुराना बिछड़ापन जैसे एक पल में मिट गया।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि ब्रिटिश काल में कई लोग इस इलाके से फिजी और कैरेबियन देशों में भेजे गए थे. परिवार के एक हिस्से का फिर कभी भारत लौटना नहीं हुआ, लेकिन गांव में उनके नाम और यादें संरक्षित रहीं. यही बची हुई जानकारी अब एक नए रिश्ते की कड़ी बन गई।

दंपति का कहना है कि यह मिलन उनके लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं. अयोध्या में की गई मन्नत पूरी होने पर उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का सबसे भावुक क्षण कहा. गांव वालों के साथ बैठकर कथाएं सुनना, पुरखों की जमीन देखना और परिवार से जुड़े लोगों को गले लगाना—इन सबने 115 वर्षों का फासला मिटा दिया।

एक साधारण यात्रा, एक प्रार्थना और एक उम्मीद, इन तीनों ने मिलकर इस परिवार की खोई हुई कहानी फिर से जोड़ दी।

 

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