Last Updated Jan - 08 - 2026, 05:05 PM | Source : Fela News
पश्चिम बंगाल में ED की छापेमारी के दौरान सीएम ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं। IPAC दफ्तर से उठी 'ग्रीन फाइल' ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। गुरुवार सुबह Enforcement Directorate (ED) की छापेमारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। जांच एजेंसी ने Indian Political Action Committee (IPAC) के को-फाउंडर Pratik Jain के आवास और दफ्तर पर रेड की। लेकिन इस कार्रवाई को सबसे ज्यादा चर्चा में लाने वाली बात यह रही कि छापेमारी की खबर मिलते ही खुद मुख्यमंत्री Mamata Banerjee मौके पर पहुंच गईं।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही ED की कार्रवाई की जानकारी सामने आई, ममता बनर्जी अपने काफिले और Kolkata के पुलिस कमिश्नर के साथ पहले प्रतीक जैन के आवास और फिर IPAC के दफ्तर पहुंचीं। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल साफ नजर आई।
IPAC दफ्तर पहुंचते ही ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में ED की कार्रवाई पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह छापेमारी जांच के लिए नहीं, बल्कि उनकी पार्टी के चुनावी दस्तावेजों को निशाना बनाने के उद्देश्य से की गई है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि ED अधिकारी कुछ फाइलें अपने साथ ले जाना चाहते थे, जिनमें उनकी पार्टी से जुड़ी अहम रणनीतिक जानकारियां हो सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में जिस चीज ने सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए, वह थी एक कथित 'ग्रीन फाइल'। बताया जा रहा है कि IPAC दफ्तर में मौजूद कुछ फाइलों को ममता बनर्जी के काफिले की गाड़ी में रखा गया। हालांकि, यह फाइलें क्या थीं और इनमें किस तरह की जानकारी थी, इसे लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ साफ नहीं किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच में दखल दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।
ED की ओर से फिलहाल इस मामले में विस्तृत बयान नहीं आया है। एजेंसी सूत्रों का कहना है कि छापेमारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और जांच अपने दायरे में जारी है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई और उस पर मुख्यमंत्री की सीधी प्रतिक्रिया ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। जहां एक ओर विपक्ष इसे जांच एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ खेमे का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिएञ० लिए किया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस 'ग्रीन फाइल' को लेकर इतना बवाल मचा है, उसमें आखिर क्या है? क्या यह महज चुनावी रणनीति से जुड़े कागजात हैं या फिर कोई ऐसी जानकारी, जो आने वाले दिनों में बंगाल की सियासत को और उथल-पुथल कर सकती है। आने वाले वक्त में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।