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मायावती ने अखिलेश यादव के साथ मिलकर की जातिगत जनगणना की मांग की पुष्टि

मायावती ने अखिलेश यादव के साथ मिलकर की जातिगत जनगणना की मांग की पुष्टि

Last Updated Jun - 17 - 2025, 12:11 PM | Source : Fela News

बसपा सुप्रिमो मायावती ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए जातिगत जनगणना के मुद्दे का समर्थन किया और सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील की।
मायावती ने अखिलेश यादव के साथ मिलकर की जातिगत जनगणना की मांग की पुष्टि
मायावती ने अखिलेश यादव के साथ मिलकर की जातिगत जनगणना की मांग की पुष्टि

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की नेता एवं यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हाल ही में जातिगत जनगणना की मांग को समर्थन देते हुए इसे एक जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम देरी से परंतु सही समय पर उठाया गया है  ।

पिछले महीने कांशीराम जयंती के मौके पर मायावती ने कहा कि बहुजन समाज की आबादी 80 % से अधिक है और सामाजिक न्याय का आधार बनाने के लिए ऐसी जनगणना आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार से इसे जल्द शुरू करने का आग्रह भी किया  ।

इससे पहले फरवरी 2023 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने विधानसभा में जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया था, तब मायावती ने न केवल समर्थन जताया बल्कि यह भी कहा कि यह कदम सपा को पहले अपने शासनकाल में ही लेना चाहिए था  । हालांकि, उन्होंने उस समय भी ‍नियति और नीति पर सवाल उठाए थे कि जातिगत जनगणना के नाम पर अब वोटबैंक की राजनीति क्यों हो रही है 

BSP ने लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग की है; इस कदम का स्वागत करती हूँ  ।

सरकार को इसे जल्द लागू करना चाहिए, ताकि बहुजन समाज का डेटा स्पष्ट हो सके और उनकी योजनाएँ बन सकें  ।

साथ ही उन्होंने सपा को चौंकाते हुए उनकी प्रष्टता और अतीत की राजनीति पर भी सवाल उठाए  ।

जातिगत जनगणना को लेकर यूपी में अब विपक्षी पार्टियाँ एक स्वर में बोल रही हैं। हाल ही में बिहार में हुई इसी तरह की गतिविधियों से भी इसे बल मिला है  ।

यूनियन कैबिनेट ने 30 अप्रैल 2025 को प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना में जातिगत आंकड़ों को शामिल करने का निर्णय लिया था, जिसे मायावती ने ऐतिहासिक कदम करार दिया था  ।

सियासी गठबंधन महागठबंधन में मायावती व अखिलेश का एकजुट रुख भी इसी संवाद का परिणाम माना जा सकता है  ।

संक्षेप में कहा जाए तो, मायावती ने जातिगत जनगणना को एक महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय का उपकरण बताया है और सरकार से इसे जल्‍द लागू करने का आग्राह किया है। सपा के साथ उनका रवैया इस दिशा में एक साझा राजनीतिक सोच की ओर इशारा कर रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार इस सार्वजनिक मांग को स्वीकृति देती है और समयबद्ध तरीके से अमल करती है, या फिर यह मुद्दा आगामी चुनावों तक रहस्य बना रहेगा।

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