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एसडीएम पर पिस्टल तानने वाले विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट, सुप्रीम कोर्ट ने दी दो सप्ताह में सरेंडर की मोहलत

एसडीएम पर पिस्टल तानने वाले विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट, सुप्रीम कोर्ट ने दी दो सप्ताह में सरेंडर की मोहलत

Last Updated May - 22 - 2025, 01:06 PM | Source : Fela News

पिस्टल कांड में फंसे विधायक कंवरलाल मीणा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, दो हफ्ते में सरेंडर का आदेश।
एसडीएम पर पिस्टल तानने वाले विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट
एसडीएम पर पिस्टल तानने वाले विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट

राजस्थान के बारां जिले के अंता से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट मंडरा रहा है।  सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में एसडीएम पर पिस्टल तानने के मामले में उनकी सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दो सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

3 फरवरी 2005 को झालावाड़ जिले के खाताखेड़ी गांव में उपसरपंच चुनाव में अनियमितताओं के विरोध में सड़कों पर उतरे लोगों के बीच पहुंचे विधायक कंवरलाल मीणा ने तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता की कनपटी पर पिस्टल तान दी थी और पुनर्मतदान की मांग की थी।  इस घटना के बाद एसडीएम की शिकायत पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

2018 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन अपील कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए 2020 में तीन साल की सजा सुनाई।  राजस्थान हाई कोर्ट ने 2 मई 2025 को इस सजा को बरकरार रखा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 मई को खारिज कर दिया।  अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।  इस आधार पर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।  हालांकि, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा सचिव को हाई कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपकर विधायक की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।  वहीं, भाजपा पर विधायक को बचाने के आरोप लग रहे हैं, जिससे राज्य की सियासत गरमा गई है।

यदि कंवरलाल मीणा समय पर सरेंडर नहीं करते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी संभव है, और सजा के तहत वे आगामी छह वर्षों तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।

 

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