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पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही: 'प्रदूषण नियंत्रण' योजना के बजट का 1% भी खर्च नहीं हुआ

पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही: 'प्रदूषण नियंत्रण' योजना के बजट का 1% भी खर्च नहीं हुआ

Last Updated Mar - 29 - 2025, 03:17 PM | Source : Fela News

पर्यावरण संरक्षण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। 'प्रदूषण नियंत्रण' योजना के लिए आवंटित बजट का 1% भी खर्च नहीं हुआ। सरकारी उदासीनता से पर्यावरण सुधार की योजनाएं
पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही: 'प्रदूषण नियंत्रण' योजना के बजट का 1% भी खर्च नहीं हुआ
पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही: 'प्रदूषण नियंत्रण' योजना के बजट का 1% भी खर्च नहीं हुआ

भारत में बढ़ते प्रदूषण के खतरे के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। 25 मार्च को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार की 'प्रदूषण नियंत्रण' योजना के लिए आवंटित ₹858 करोड़ के बजट में से अब तक केवल ₹7.22 करोड़ (1% से भी कम) खर्च किए गए हैं। यह आंकड़ा न केवल सरकार की पर्यावरण नीतियों पर सवाल उठाता है, बल्कि देश में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताओं को भी उजागर करता है।

बजट का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ?

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन पर संसदीय स्थायी समिति ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि योजना की मंजूरी और उसके जारी रहने को लेकर अनिश्चितता के कारण धनराशि खर्च नहीं हो सकी। यह स्पष्टीकरण तब और आश्चर्यजनक लगता है जब पिछले दो वित्तीय वर्षों में इस योजना के बजट का पूरा उपयोग किया गया था।

प्रदूषण की गंभीर स्थिति

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। हाल ही में जारी वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश है, जबकि दिल्ली को सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में स्थान दिया गया है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियां न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रही हैं।

विशेषज्ञों की राय: क्या किया जाना चाहिए?

पूर्व WHO चीफ साइंटिस्ट और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कुछ सुझाव दिए:

1. एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना: बायोमास जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए गरीब परिवारों को अतिरिक्त सब्सिडी दी जाए।


2. सार्वजनिक परिवहन का विस्तार: अधिक से अधिक लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए।


3. उच्च उत्सर्जन वाले वाहनों पर सख्त जुर्माना: इससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम होगी।


4. निर्माण स्थलों और उद्योगों पर सख्ती: पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

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