Last Updated Jul - 17 - 2025, 01:00 PM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में दिव्यांग कैदियों के लिए रैम्प, शौचालय और सेंसरी सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट संदेश जारी किया कि जेल में बंद होने से भी किसी को ‘मानव गरिमा’ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने देश भर की जेलों में ऐसे दोषियों के लिए सुविधा प्रदान करने का आदेश दिया, जो शारीरिक या संवेदी रूप से दिव्यांग हैं
कोर्ट ने कहा कि विभिन्न जेलों में रैम्प की कमी, शौचालयों की अनुपयोगिता और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने इन्हें कानूनी स्तर पर भी चोट पहुंचाई है। रैम्प, हाथ पकड़ने की रेलिंग, एलिवेशन एक्सेस, ब्रेल संकेत और सुनाई देने वाले अलार्म की आवश्यकता है।
अदालत ने जेल प्रशासन को आठ सप्ताह के अंदर सुधार की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने जानकारी दी कि कई जेलों में ये प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं है, जो संविधान के Article 14 (बराबरी का अधिकार) और Article 21 (मानव गरिमा और स्वतन्त्र जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है।
विश्लेषकों ने इसे न्यायपालिका की संवेदनशीलता का उदाहरण बताया, जो समाज के कमज़ोर तबकों की आवाज बनकर उभरा है। इससे जेलों में सुधार की दर बढ़ने की संभावना है और भविष्य में ऐसे नियम बनेंगे जिनसे सभी दोषियों को समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन मिलेगा।