Last Updated Sep - 01 - 2025, 03:36 PM | Source : Fela News
निवा बुपा ने 61 लाख रुपये का कैशलेस क्लेम अस्वीकार किया, जिससे मरीज और उसके परिवार को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, इलाज में भी आई बड़ी परेशानी।
मुंबई के एक बड़े अस्पताल में इलाज करा रहे एक मरीज और उनके परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा उस वक्त बेकार साबित हुआ जब निवा बु्पा हेल्थ इंश्योरेंस ने 61 लाख रुपये के कैशलेस क्लेम को नकार दिया। मरीज के पास कुल ₹2.40 करोड़ का कवरेज वाला हाई-वैल्यू पॉलिसी पैकेज था और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए शुरुआती मंजूरी भी दी गई थी। लेकिन जब वास्तविक खर्च प्रारंभिक अनुमोदन से कहीं अधिक निकला, तो कंपनी ने भुगतान से इनकार कर दिया।
यह मामला मायलॉइड ल्यूकेमिया से जूझ रहे मरीज का है, जहां समय पर इलाज ज़रूरी था। परिवार ने सभी जरूरी दस्तावेज और स्पष्ट जानकारी देने के बावजूद कंपनी से न तो समय पर जवाब मिला और न ही क्लेम का निपटारा। आखिरकार परिवार को खुद ही फंड की व्यवस्था करनी पड़ी, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ गया।
इस घटना ने पॉलिसीधारकों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रीमियम नियमित रूप से चुकाया जा रहा है और मंजूरी भी मिल चुकी हो, तब भी यदि आपात स्थिति में बीमा कंपनी पीछे हट जाए तो ऐसे कवरेज का भरोसा किस काम का? आलोचकों का कहना है कि तकनीकी खामियां और अस्पष्ट शर्तें कई बार नैतिकता और संवेदनशीलता पर भारी पड़ जाती हैं।
यह मामला एक बार फिर स्वास्थ्य बीमा दावों की प्रक्रिया में मौजूद खामियों को उजागर करता है। यह बताता है कि क्यों कड़े नियामक हस्तक्षेप और बीमा कंपनियों पर अधिक जवाबदेही की ज़रूरत है, ताकि लोग प्रीमियम भरने के बाद संकट की घड़ी में बेसहारा न रह जाएं।