Last Updated May - 07 - 2026, 12:02 PM | Source : Fela News
Operation Sindoor Anniversary: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम इसलिए रखा गया क्योंकि यह उन भारतीय महिलाओं के सिंदूर का प्रतीक माना गया, जिन्होंने आतंकी हमलों में अपने पति खो दिए थे। यह नाम प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया था।
आज से ठीक एक साल पहले 6-7 मई 2025 की रात भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नामित किया गया था और इसे भारत के सैन्य इतिहास का निर्णायक मोड़ माना जाता है। इसकी नींव 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले में रखी गई थी, जिसमें 26 लोगों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
आधी रात में शुरू हुआ बड़ा सैन्य अभियान
7 मई 2025 की अल सुबह 1:05 बजे भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। मात्र 25 मिनट में पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया गया। इसमें आधुनिक मिसाइलों और एआई आधारित टारगेट सिस्टम का इस्तेमाल हुआ।
आतंकी ठिकानों पर भारी तबाही
ब्रह्मोस, स्कैल्प और क्रिस्टल मेज मिसाइलों से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। शुरुआती आकलन के अनुसार 100 से अधिक आतंकी मारे गए। यह भारत की अब तक की सबसे सटीक और तेज सैन्य कार्रवाई मानी गई।
चार दिन में पाकिस्तान की हालत खराब
7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन ने व्यापक रूप ले लिया। 10 मई को रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस सहित कई अहम पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला हुआ। भोलारी, सुक्कुर, सरगोधा समेत 11 एयरबेसों पर 19 बार ब्रह्मोस हमले किए गए, जिससे पाकिस्तान की वायु शक्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
अमेरिका तक पहुंचा कूटनीतिक दबाव
इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका से हस्तक्षेप की गुहार लगाई, जबकि भारत ने स्पष्ट किया कि यह आतंकवाद विरोधी कार्रवाई है। अमेरिकी प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि भारत किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा।
एक साल बाद भी दिख रहे तबाही के निशान
सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस अब भी क्षतिग्रस्त दिखाई देते हैं। भोलारी और मुरीद जैसे बेस पर मरम्मत कार्य अब तक जारी है। यह इस ऑपरेशन की गंभीरता को दर्शाता है।
भारत की सैन्य नीति में बड़ा बदलाव
ऑपरेशन के बाद भारत ने अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत किया है। S-400 सिस्टम, राफेल फाइटर जेट और ड्रोन तकनीक में बड़े निवेश किए गए हैं। इस अभियान ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को पूरी तरह नया रूप दिया है।
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