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महाशिवरात्रि पर पार्वती शिव प्रेम कथा वैलेंटाइन-डे से जोड़ती है

महाशिवरात्रि पर पार्वती शिव प्रेम कथा वैलेंटाइन-डे से जोड़ती है

Last Updated Feb - 14 - 2026, 06:15 PM | Source : Fela News

महाशिवरात्रि और वैलेंटाइन डे के बीच प्रेम की गहराई को धार्मिक दृष्टिकोण से जोड़ती एक कथा देवी पार्वती और महादेव शिव के मिलन पर केंद्रित है, जिसमें पार्वती ने शिव
महाशिवरात्रि पर पार्वती शिव प्रेम कथा वैलेंटाइन-डे से जोड़ती है
महाशिवरात्रि पर पार्वती शिव प्रेम कथा वैलेंटाइन-डे से जोड़ती है

यह कथा प्रेम में समर्पण, विश्वास और आत्म-उन्नयन के महत्व को रेखांकित करती है. महाशिवरात्रि हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का पर्व है, जिसे साल 15 फरवरी 2026 को मनाया जा रहा है. यह दिन दोनों के प्रेम और समर्पण की याद दिलाता है, जबकि वैलेंटाइन डे प्रेम के इज़हार का आधुनिक प्रतीक है.

सूत्रों के मुताबिक, शिव-पार्वती की कथा में बताया गया है कि पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में सती के रूप में शिव से विवाह किया था. राजा दक्ष के यज्ञ में सती के अपमान और त्याग के बाद शिव ने स्वयं को समाधि में लीन कर लिया. संतुलन बिगड़ने पर देवताओं को सहायता की जरूरत पड़ी और इसी बीच सती का हिमालय में जन्म पार्वती के रूप में हुआ. पार्वती ने निर्णय लिया कि वह महादेव शिव को अपना पति बनाएंगी और इसके लिए कठिन तपस्या शुरू की.

देवर्षि नारद ने पार्वती को यह स्मरण कराया कि शिव ही उनके नियत पति हैं और यह लक्ष्य पाने के लिए कठोर साधना आवश्यक है. नारद के प्रेरणादायक शब्दों ने पार्वती के संकल्प को और मजबूत किया. कथा में वर्णित है कि उन्होंने फलाहार, पत्तों पर जीवन और अंततः पत्तों का त्याग करते हुए तपस्या की, जिससे उनके प्रेम और समर्पण का स्तर बढ़ा.

बताया जा रहा है कि जब पार्वती का तप अत्यधिक हो गया, तो शिव ने उनकी निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए सप्तर्षियों को भेजा. उन्होंने पार्वती को शिव की जीवनशैली के बारे में बताते हुए उनके निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा, लेकिन पार्वती ने सम्मानपूर्वक अपने निश्चय पर अडिग रहते हुए कहा कि उन्होंने शिव को अपना पति मान लिया है और अब वे उनके गुण-दोष नहीं देखते.

सूत्रों के मुताबिक, बाद में शिव स्वयं पार्वती के सामने प्रकट हुए, जिससे दोनों का दिव्य विवाह हुआ और उनका मिलन संसार के संतुलन का प्रतीक बन गया. यह कथा महाशिवरात्रि के पर्व को सिर्फ पूजा का दिन नहीं बल्कि प्रेम और तपस्या का प्रतीक भी बताती है.

यह भी उल्लेख मिलता है कि आधुनिक रूप में वैलेंटाइन डे प्रेम के इज़हार का प्रतीक बन गया है, जबकि पार्वती-शिव की कथा यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि विश्वास, तप और समर्पण का संगम है. महाशिवरात्रि की रात में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अनुष्ठान इस दिव्य प्रेम स्मृति को याद रखने का तरीका भी माना जाता है.

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महाशिवरात्रि: शिव-पार्वती मिलन की दिव्य कथा, जानिए पूरी पौराणिक कहानी यहां

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