Last Updated Feb - 14 - 2026, 04:38 PM | Source : Fela News
बजट सत्र 2026 के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को इंडो-यूएस डील, एप्स्टीन फाइल्स और किसान संकट जैसे मुद्
उनकी रणनीति संसद की बहस को सड़क तक ले जाने और आगामी चार राज्यों के चुनावों में कांग्रेस को लाभ दिलाने की ओर केंद्रित है.रिपोर्ट के अनुसार, बजट सत्र के पहले चरण में राहुल गांधी विपक्ष के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए, जिन्होंने संसद में लगातार करीब 50 मिनट तक बिना रुके सरकार की नीतियों पर हमला बोला. उनके आक्रामक रुख ने कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के अन्य विपक्षी दलों को एकजुट दिखाया.
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने संसद में इंडो-यूएस समझौते को “देश के हितों का सौदा” करार देते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय हितों की अनदेखी करता है, और इसे सरकार के विदेशी दबाव में आने के संकेत के रूप में पेश किया. इसके साथ ही उन्होंने एप्स्टीन फाइल्स विवाद का हवाला देते हुए सरकार की छवि पर प्रश्न उठाए.
इसके अलावा, राहुल गांधी ने किसानी संकट को भी प्रमुख मुद्दा बनाते हुए सरकार की कृषि नीति पर तीखी टिप्पणी की. इस बीच उन्होंने कृषि संकट को चुनावी रणनीति का केंद्र भी बताया है और किसानों के हितों को संसद के बहस के माध्यम से प्रमुखता से उठाया.
बताया जा रहा है कि इस आक्रामक शैली से कांग्रेस के भीतर जोश दिखाई दे रहा है, जहां पार्टी के सांसद अपने नेता के पीछे एकजुट दिखाई दिए. उन्होंने संसद में निलंबन झेला, धरने दिए और विपक्षी दलों के साथ तालमेल बढ़ाया जिससे उनकी रणनीति को बल मिला.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि राहुल गांधी की रणनीति केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संसद की ऊर्जा को सड़क पर जन-आंदोलन में बदलने का प्रयास कर रहे हैं. इसका मकसद आगामी चार राज्यों — पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल , में होने वाले चुनावों में कांग्रेस को फायदा पहुंचाना भी बताया जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस का यह रुख बजट सत्र के शेष दिनों में भी जारी रहेगा, और पार्टी अपेक्षा कर रही है कि यह रणनीति संगठनात्मक कमजोरी को पाटने और जन-आंदोलन की स्वीकृति हासिल करने में मदद करेगी. हालांकि यह भी माना जा रहा है कि वास्तविक परीक्षा सड़क स्तर पर जन समर्थन जुटाने की होगी.
इस बीच बजट सत्र का पहला चरण समाप्त हो चुका है, और संसद 9 मार्च तक स्थगित है, जिसके बाद दूसरी चरण की कार्यवाही पुनः शुरू होगी. इस दौरान राजनीतिक बहस और आलोचना का जारी माहौल सियासी विशेषज्ञों के लिए ध्यान का विषय बना हुआ है.
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