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फिर एक मंच पर पवार परिवार, पुणे चुनाव में NCP का साझा दांव

फिर एक मंच पर पवार परिवार, पुणे चुनाव में NCP का साझा दांव

Last Updated Jan - 10 - 2026, 03:23 PM | Source : Fela News

पुणे नगर निगम चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत, अजित पवार और सुप्रिया सुले साथ बैठे, NCP और NCP (शरद पवार ) का संयुक्त घोषणापत्र जारी ।
पुणे चुनाव में NCP का साझा दांव
पुणे चुनाव में NCP का साझा दांव

 

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। नगर निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच अब पवार परिवार में भी सियासी दूरी कम होती नजर आ रही है। पुणे नगर निगम चुनाव को लेकर Ajit Pawar की पार्टी और Sharad Pawar गुट ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। शनिवार को दोनों दलों ने पुणे के लिए संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी।

इस मौके पर सबसे ज्यादा ध्यान उस तस्वीर ने खींचा, जिसमें अजित पवार और Supriya Sule एक ही मंच पर साथ बैठे नजर आए। लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक तनातनी के बाद यह दृश्य कई मायनों में अहम माना जा रहा है। भले ही औपचारिक तौर पर दोनों गुटों के विलय की कोई घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन साझा घोषणापत्र को आगामी चुनावी रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

महाराष्ट्र में इस वक्त 29 नगर निकायों के चुनाव होने हैं और सभी प्रमुख दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स के साथ आने के बाद अब पुणे में चाचा-भतीजे का साथ आना राजनीतिक समीकरणों को और दिलचस्प बना रहा है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ जैसे शहरी इलाकों में एनसीपी का पारंपरिक प्रभाव रहा है, ऐसे में दोनों गुटों का साथ आना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

संयुक्त घोषणापत्र में शहरी विकास, बुनियादी सुविधाएं, पानी की समस्या, ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन और पारदर्शी प्रशासन जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। नेताओं ने दावा किया कि पुणे को एक आधुनिक, स्मार्ट और नागरिकों के अनुकूल शहर बनाने के लिए दोनों दल मिलकर काम करेंगे। प्रेस को संबोधित करते हुए अजित पवार ने कहा कि स्थानीय विकास और नागरिकों के हित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ नगर निगम चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। पवार परिवार का एक मंच पर आना कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर सकता है और वोट बैंक को एकजुट करने में मददगार साबित हो सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि पुणे नगर निगम चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह चुनाव महाराष्ट्र की बड़ी सियासी तस्वीर को भी दिशा दे सकते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी मेल कितना टिकाऊ साबित होता है और इसका असर चुनावी नतीजों में कितना दिखाई देता है। 

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