Last Updated Jan - 23 - 2026, 03:28 PM | Source : Fela News
केरल और तमिलनाडु दौरे के जरिए प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण भारत में भाजपा की राजनीतिक जमीन मजबूत करने और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करते नजर आ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केरल और तमिलनाडु दौरे को भाजपा के ‘मिशन साउथ’ के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह दौरा केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। दक्षिण भारत के इन दोनों राज्यों में भाजपा को अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिली है, ऐसे में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास प्रस्तावित है। इसमें बुनियादी ढांचे, रेल, बंदरगाह और औद्योगिक विकास से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय विकास को गति देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। वहीं भाजपा नेतृत्व इसे केंद्र सरकार की विकास नीति का उदाहरण बताकर जनता के बीच अपनी बात रखने की तैयारी में है।
इस बीच राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केरल और तमिलनाडु में भाजपा के लिए जमीन पथरीली मानी जाती है। दोनों राज्यों में क्षेत्रीय और वैचारिक राजनीति का प्रभाव लंबे समय से मजबूत रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री की मौजूदगी को पार्टी के कैडर को सक्रिय करने और स्थानीय नेतृत्व को मजबूती देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या विकास परियोजनाओं के जरिए भाजपा इन राज्यों में अपना राजनीतिक आधार बढ़ा पाएगी।
वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना है कि यह दौरा चुनावी लाभ को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार विकास योजनाओं को राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि परियोजनाओं का उद्देश्य केवल जनकल्याण और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा देना है, न कि राजनीतिक फायदा उठाना।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों, उद्योग जगत और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि दक्षिण भारत में पार्टी को लंबे समय तक निवेश और निरंतर संपर्क की जरूरत है, जिसकी शुरुआत इन दौरों से की जा रही है।
फिलहाल प्रधानमंत्री का यह दौरा विकास और राजनीति के मेल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि केरल और तमिलनाडु में भाजपा को इससे कितना राजनीतिक लाभ मिल पाता है और क्या ‘मिशन साउथ’ पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो पाता है।
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