Last Updated Jan - 20 - 2026, 05:21 PM | Source : Fela News
मुंबई बीएमसी मेयर चुनाव से पहले शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट की भूमिका को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी की संख्या बल और संभावित समीकरणों पर नजरें ट
मुंबई महानगरपालिका के मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट की रणनीति पर चर्चा बढ़ गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के पास इस समय बीएमसी में केवल शिवसेना यूबीटी के पार्षद हैं, जबकि बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट के बीच संख्या को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है। इसी कारण मेयर चुनाव में संभावित समीकरणों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट ने मेयर चुनाव को ध्यान में रखते हुए पहले से ही अपनी स्थिति स्पष्ट रखने की कोशिश की है। पार्टी की रणनीति का फोकस संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक संदेश पर भी बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि यूबीटी गुट किसी भी स्थिति में अपने पार्षदों को एकजुट रखने और चुनावी प्रक्रिया में अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
इस बीच, बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट की ओर से भी मेयर चुनाव को लेकर अंदरूनी स्तर पर रणनीति बनाई जा रही है। हालांकि, दोनों दलों की संयुक्त या अलग-अलग ताकत को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह चर्चा तेज है कि क्या विपक्षी खेमे के पास मेयर पद के लिए निर्णायक बहुमत होगा या नहीं।
जानकारों का कहना है कि बीएमसी जैसे बड़े नगर निकाय में मेयर का चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं होता, बल्कि राजनीतिक समझ और समय पर लिए गए फैसले भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी संदर्भ में उद्धव ठाकरे की भूमिका को लेकर यह कहा जा रहा है कि उन्होंने पहले से ही संभावनाओं को देखते हुए अपने विकल्प खुले रखे हैं।
वहीं दूसरी ओर, यूबीटी गुट की ओर से यह संकेत दिए गए हैं कि पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी और किसी भी तरह के दबाव या सौदेबाजी से दूर रहेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि बीएमसी चुनाव में जनता के फैसले का सम्मान किया जाएगा और उसी के अनुसार अगला कदम तय होगा।
फिलहाल, मेयर चुनाव की तारीख और अंतिम प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। तब तक सभी दलों की रणनीति और आपसी समीकरणों पर राजनीतिक नजर बनी हुई है। बीएमसी मेयर चुनाव न सिर्फ मुंबई की स्थानीय राजनीति, बल्कि राज्य स्तर की सियासत के लिए भी अहम माना जा रहा है।
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