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पुर्तगाली या अंग्रेज? बॉम्बे नाम की असली कहानी जानिए यहाँ

पुर्तगाली या अंग्रेज? बॉम्बे नाम की असली कहानी जानिए यहाँ

Last Updated Jan - 23 - 2026, 05:32 PM | Source : Fela News

बीएमसी मेयर सस्पेंस के बीच जानिए मुंबई के नाम का इतिहास। पुर्तगाली, अंग्रेज और स्थानीय संस्कृति से कैसे जन्मा बॉम्बे और फिर मुंबई नाम।
बॉम्बे नाम की असली कहानी जानिए यहाँ
बॉम्बे नाम की असली कहानी जानिए यहाँ

मुंबई एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और राजनीति का संगम है। आज जब बीएमसी मेघर के नाम को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है और महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में महिला मेयर चुनी जाने की चर्चा हो रही है, तो इसी बहाने मुंबई के नाम से जुड़ा एक पुराना सवाल फिर सामने आ गया है। आखिर मुंबई को बॉम्बे किसने नाम दिया- पुर्तगालियों ने या अंग्रेजों ने।

मुंबई की पहचान सिर्फ उसके ऊंचे टावरों या आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके नाम से भी जुड़ी है। इस नाम की जड़ें औपनिवेशिक इतिहास से कहीं ज्यादा गहरी और स्थानीय हैं।

मुंबा देवी से मुंबई तक की कहानी

मुंबई का सबसे पुराना संदर्भ कोली समुदाय से जुड़ा है। कोली इस क्षेत्र के मूल निवासी थे और समुद्री जीवन पर निर्भर रहते थे। उनकी आराध्य देवी थीं मुंबा देवी। माना जाता है कि इस क्षेत्र को मुंबा या मुंबा देवी की भूमि कहा जाता था। आज भी दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार इलाके में स्थित मुंबा देवी मंदिर इस सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है। स्थानीय मराठी बोली में 'मुंबे या 'मुंबई शब्द प्रचलित था। यह नाम किसी विदेशी शासक ने नहीं दिया, बल्कि स्थानीय समाज की पहचान से जन्मा।

बंबई नाम कैसे प्रचलित हुआ

इतिहासकारों के अनुसार, समय के साथ मुंबे शब्द का उच्चारण बदलकर 'बंबई जैसा हो गया। इसके पीछे व्यापारिक संपर्क और भाषाई प्रभाव बड़ी वजह बने। 13वीं-14वीं सदी में अरब और फारसी व्यापारी इस क्षेत्र में आते थे और वे स्थानीय शब्दों को अपनी बोली में ढाल लेते थे।

उस दौर में यह इलाका सात द्वीपों में बंटा हुआ था माहिम, वर्ली, परेल, मझगांव, मुंबादेवी, कोलीवाड़ा और कुलाबा। इन सभी द्वीपों को सामूहिक रूप से मुंबे कहा जाता था।

पुर्तगाली और बॉम्बे नाम का रिश्ता

1498 के बाद जब पुर्तगाली पश्चिमी भारत पहुंचे, तो उन्होंने इस क्षेत्र को अपने दस्तावेजों में Bom Bahia लिखा, जिसका अर्थ था "अच्छी खाड़ी"। बाद में उन्होंने स्थानीय नाम के प्रभाव में इसे Bombaim कहना शुरू किया। साल 1661 में पुर्तगाल ने यह क्षेत्र दहेज के रूप में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय को सौंप दिया। इसके बाद 1668 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसका प्रशासन संभाला।

अंग्रेजों ने पुर्तगाली शब्द Bombaim को अपनी भाषा में सरल बनाकर Bombay लिखा। इस तरह बॉम्बे नाम अंग्रेजों द्वारा मानकीकृत हुआ, लेकिन उसकी जड़े पुर्तगाली और स्थानीय उच्चारण में थीं।

ब्रिटिश दौर में बॉम्बे का विस्तार

ब्रिटिश शासन में बॉम्बे तेजी से विकसित हुआ। बंदरगाह, रेलवे, कपड़ा उद्योग और प्रशासनिक ढांचे ने इसे भारत का वित्तीय केंद्र बना दिया। Bombay Presidency के गठन के साथ यह नाम दुनिया भर में मशहूर हुआ।

1995 में मुंबई नाम की वापसी

साल 1995 में महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक रूप से Bombay का नाम बदलकर Mumbai कर दिया। इसका उद्देश्य था स्थानीय संस्कृति, मराठी पहचान और औपनिवेशिक नामों से मुक्ति हालांकि आज भी कुछ संस्थानों में बॉम्बे नाम जीवित है, जैसे Bombay High Court और Bombay Stock Exchange। यह नाम इतिहास की एक परत बन चुका है।

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